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दिव्यांग मुकेश को दिल दे बैठी थी गौरी, एक मिस्ड कॉल से शुरू हुई प्रेमकहानी, वादा किया तो निभाया

संसार में ईश्वर ने तमाम चीजें बनाई हैं। उन्हीं चीजों में से कुछ ऐसी चीजें भी ईश्वर ने बनाई हैं, जिन्हें परिभाषित करना नामुमकिन है। उन्हीं चीजों में से एक प्रेम है। संसार में प्रेम ही एकमात्र ऐसी चीज है जिसे परिभाषित नहीं किया जा सकता है। प्रेम को धन देकर खरीदा भी नहीं जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस इंसान को प्रेम होता है वही प्रेम का एहसास कर सकता है। बहुत से कवि ऐसे हैं जो प्रेम को सर्वोच्च गुण की उपाधि भी दे चुके हैं।

हम सभी लोग आए दिन बहुत सी प्रेम कहानियां सुनते रहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जोड़ियां आसमान में बनती हैं। इसी बीच सुपौल में एक ऐसी ही जोड़ी की खूब चर्चा हो रही है। दरअसल, इस जोड़ी की प्रेम कहानी एक मिस्ड कॉल से शुरू हुई थी लेकिन कुछ ही पलों में जाने क्या बातचीत हुई कि गौरी दोनों पैरों से दिव्यांग हाथों से चलने वाले मुकेश को दिल दे बैठी और आखिर में गौरी में उससे शादी कर ली।

मिस्ड कॉल से शुरू हुई थी प्रेम कहानी

दरअसल, आज हम आपको प्यार की जिस अनोखी कहानी के बारे में बता रहे हैं यह सुपौल से सामने आई है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि गौरी नाम की लड़की जो मूल रूप से झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली है, उसने एक दिन भूल से एक नंबर पर मिस्ड कॉल कर दिया था। गौरी का ऐसा बताना है कि वह नंबर सुपौल के बसबिट्टी गांव के रहने वाले मुकेश का था।

मिस्ड कॉल से ही इन दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया और बातचीत करते करते यह दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे। लेकिन गौरी ने शादी का प्रस्ताव तब रखा था जब मुकेश ने उसे साफ साफ अपने दिव्यांग होने के बारे में सब कुछ बता दिया था। मुकेश ने तो गौरी से शादी करने के लिए मना भी कर दिया था।

दिव्यांग मुकेश को दिल दे बैठी थी गौरी

जब मुकेश ने गौरी को अपने दिव्यांग होने के बारे में सब कुछ बता दिया और उसने गौरी से शादी करने के लिए इंकार किया तो इस प्रेम संबंध से गौरी किसी भी तरह हटने के लिए तैयार नहीं हुई। वह मुकेश को दिल दे बैठी थी। गौरी ने यह फैसला कर लिया था कि अगर वह किसी से शादी करेगी तो वह मुकेश ही होगा। फिर क्या था उसने ट्रेन पकड़ी और सुपौल के लिए रवाना हो गई। गौरी के साथ उसका भाई भी था।

जब बहन के साथ झारखंड से सुपौल पहुंचकर गौरी के भाई ने मुकेश को देखा कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है तो उसने अपनी बहन गौरी को अपने साथ वापस लौटने के लिए कहा। लेकिन गौरी वापस जाने के लिए तैयार नहीं हुई थी। उसने अपने भाई से कहा कि मुकेश के पैर नहीं है तो क्या? वह शादी करेगी तो उसी से। गौरी ने अपने भाई से कहा कि जीवन में दोनों साथ होंगे तो मिलजुल कर हंसी-खुशी, सुख-दुख आराम से कट जाएंगे। गौरी सिर्फ मुकेश से शादी करने की जिद पर अड़ी रही।

रजिस्टार कार्यालय में दोनों की हुई शादी

मुकेश का ऐसा बताना है कि उसकी मां का बचपन में ही निधन हो गया था। उसके पिता बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। मुकेश ने अपनी मौसी के साथ सुपौल कोर्ट पहुंचकर गौरी और उसके भाई से मुलाकात की। वहीं गौरी भी मुकेश से शादी करने की जिद पर अड़ी रही।

आखिर में गौरी की जिद के आगे उनको घुटने टेकने पड़े गए और सभी इस विवाह के लिए राजी हो गए। गौरी और मुकेश की शादी सुपौल के रजिस्टार कार्यालय में हुई। मुकेश का ऐसा कहना है कि वह इस शादी के लिए तैयार नहीं थे लेकिन जब गौरी सुपौल तक आ गई, तो वह इस शादी के लिए मना नहीं कर पाए।

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