धार्मिक

सूर्योदय से पहले नहीं करना चाहिए इनके मुँह का दर्शन, वरना जीवनभर करना पड़ेगा परेशानियों का सामना

बहुत पहले की बात है, एक दिन सुबह के समय मालवा नरेश राजा भोज किसी बहुत जरुरी काम से अपने रथ पर बैठकर राज्य से कहीं बाहर जा रहे थे। चार सफ़ेद घोड़ों से सजा हुआ उनका रथ राजमार्ग पर हवा से बातें करता हुआ आगे बढ़ रहा था। अचानक से राजा भोज की नजर सड़क पर पड़ी। उन्होंने सड़क से एक तेजस्वी ब्राह्मण को जाते हुए देखा। उन्होंने रथ चालाक से गाड़ी रोकने के लिए कहा।

ब्राह्मण को देखते ही किया हाथ जोड़कर प्रणाम:

महाराजा के आदेश पर गाड़ी चलन के हवा के साथ बातें करते हुए रथ को अचानक से रोक दिया। इससे रथ खींच रहे घोड़ों को थोड़ी परेशानी जरुर हुई और वह अपने खुर को पटकते हुए यथा स्थान पर रुक गए। राजा भोज रथ से उतरे और उतरते ही उन्होंने मनीषी ब्राह्मण के सामने हाथ जोड़ा और उन्हें प्रणाम किया। यह देखते ही अचानक से ब्राह्मण से अपने दोनों नेत्र बंद कर लिए।

ब्राह्मण ने राजा के अभिवादन का नहीं दिया जवाब:

यहाँ तक की ब्राह्मण ने राजा भोज के अभिवादन का जवाब भी नहीं दिया। यह देखकर राजा भोज बहुत हैरानी में पड़ गए। इसके बाद राजा भोज ने विनम्रता से हाथ जोड़कर कहा कि महाराज आपने ना ही मेरे अभिवादन का जवाब दिया और ना ही मुझे कोई आशीर्वाद दिया। उल्टा आपने मुझे देखते ही अपने दोनों नेत्र बंद कर लिए। आपके इस तरह के व्यवहार का कारण क्या है?

सुबह-सबेरे कृपण आ जाये सामने तो बंद कर लें अपनी आँखें:

राजा की बात सुनकर ब्राह्मण काफी विचार करने के बाद बोला। महाराज हमारे शास्त्रों में लिखा है कि अगर सुबह-सबेरे आपके सामने कोई कृपण आ जाये तो अपनी आँखें बंद कर लेनी चाहिए। उसका मुँह नहीं देखना चाहिए। आप भले ही बहुत प्रभावशाली राजा हैं और प्रजावत्सल हैं लेकिन आप दान देने में कंजूसी करते हैं। आपको देखकर यही लगता है कि आप इस संसार में सिर्फ लेने के लिए आये हैं, जो कुछ लिया है उसे चुकाने नहीं।

संसार से लिए हुए को चुकाना भी पड़ता है:

अगर इस संसार में किसी व्यक्ति को यश प्राप्त होता है तो उसका मूल्य भी उसे इसी संसार में चुकाना पड़ता है। इसलिए हमारे धर्म में दान को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसीलिए मैंने धर्मशास्त्रों का पालन करते हुए आपका मुँह नहीं देखा। ब्राह्मण ने बिना डरे राजा के सामने अपनी बात रखी। महाराजा भोज ने ब्राह्मण की बात सुनकर अपनी गलती स्वीकार की और उसी दिन से गरीबों को खुले दिल से दान देना शुरू कर दिया।

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