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पति ने नौकरी छोड़ने का ऐलान किया तो पत्नी ने 50 हजार की बचत से खड़ी कर दी 10 करोड़ की कंपनी

कहते हैं कि आवश्यकता ही किसी बड़े आविष्कार की जननी होती है और ये बात सिर्फ विज्ञान में ही नहीं आम जीवन में भी लागू होती हैं। देखा जाए तो कई बार परिस्थितियां हमे ऐसे संकट में डाल देती हैं कि उसके बाद करने या मरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में अगर आप पूरी शिद्दत से विकल्प ढ़ूंढ़ते हैं तो वो विकल्प आपके लिए जीवन के नए आयाम खोल देता है। यहां हम एक महिला की ऐसी ही कहानी लेकर आए हैं, जिसने जीवन में आए आर्थिक संकट से उबरने के लिए वो रास्ता तलाश किया जिसने उसे आर्थिक तंगी से आजादी दिलाने के साथ ही जीवन की नई ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया।

एक साधारण सी महिला के असाधारण हौसले की दास्तान है ये

दरअसल, ये कहानी है कि दिल्ली की ज्योति वाधवा बंसल की, जिन्होनें तकरीबन 12 साल पहले 50 हजार के साधारण से बचत से साड़ियों का एक व्यवसाय (online saree business) शुरू किया और आज उसका टर्नओवर 10 करोड़ रूपए से भी अधिक का हो चुका है। वैसे सुनने में आपको ये कहानी पूरी फिल्मी लग सकती है, असल में ये एक साधारण सी महिला के असाधारण हौसले की दास्तान है। जिसने अपनी सूझ-बूझ और मेहनत के दम पर घर की डगमगाती आर्थिक स्थिति को न सिर्फ संभाला बल्कि उसे ऐसे मुकाम तक ले गई कि वो दूसरों के लिए मिसाल बन गई।

गौरतलब है कि ज्योति वाधवा बंसल के उद्यम की ये कहानी शुरू हुई थी साल 2010 में जब उनके पति अंशुल बंसल ने निवेश बैंकर की नौकरी छोड़ने का फैसला किया। ऐसे में अपने पति के इस फैसले को सुन ज्योति सकते में आ गईं क्योंकि उस वक्त उनके घर का पूरा खर्च अंशुल की कमाई से चल रहा था। हालांकि उनके पति नौकरी छोड़ने के बाद खुद की आईटी सर्विस बिजनेस की बात कर रहे थें। पर ज्योति जानती थी कि ये बहुत बड़ा जोखिम हो सकता है, ऐसे में उन्होनें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने की ठानी। पर उस वक्त उनकी बेटी सिर्फ 2 साल की थी, ऐसे में वो बाहर जाकर नौकरी करने की सोच नहीं पा रही थी।

MBA कर चुकी ज्योति ने आर्थिक संकट में खुद के बिजनेस की ठानी

हालांकि Amity Business School से MBA कर चुकी ज्योति शादी से पहले 3 साल तक एक MNC में जॉब कर चुकी थी। लेकिन बच्ची होने के बाद उनकी प्राथमिकता पूरी तरह से बदल चुकी थी। ऐसे में उन्होनें खुद का व्यवसाय स्थापित करने का इरादा किया। लेकिन सवाल ये था कि कौन सा व्यवसाय किया जाए। वहीं तभी ज्योति को उनके किसी रिश्तेदार ने ऑनलाइन बिजनेस शुरू करने की सलाह दी, जो ज्योति को भी ठीक लगा। इसके बाद ज्योति मार्केट रिसर्च में हर दिन का 5-6 घंटे का समय देने लगीं। ताकि ये जान पाए कि ऐसा कौन सा प्रोडक्ट है जिसकी बाजार में भारी मांग है और जिसे बेंच आसानी से मुनाफा कमाया जा सकता है।

Sanskriti Vintage के नाम से शुरू किया online saree business

ऐसे में ज्योति के दिमाग में ऑनलाइन साड़ियों के बिजनेस (online saree business) का आइडिया आया, क्योंकि इसमें न तो प्रोडक्ट के एक्सपायर होने का झंझट था और न ही डिजाईन और वैरायटी की कमी। वहीं उस वक्त सिल्क फैब्रिक वाली साड़ियों की डिमांड भी काफी थी। ऐसे में ज्योति को ऑनलाइन साड़ियों के बिजनेस का आइडिया पूरी तरह से जंच गया। अब वो साड़ियों का क्लेक्शन जुटाने लगी। इसके लिए ज्योति ने बाजारों में जाकर हांथ से बुनी सिल्क साड़ियां को देखना शुरू किया। फिर अपनी 50 हजार की जमा पूंजी से कुछ सिल्क की साड़ियां खरीद उन्हे Sanskriti Vintage के नाम से ऑनलाइन (Ebay पर) बेचना शुरू कर दिया।

हालांकि शुरूआती दौर में ऑनलाइन साड़ी बेचना इतना आसान नहीं था। ज्योति बताती हैं कि पहले दो महीने में एक भी साड़ी नहीं बिकी पर वहीं कुछ लोग उनके ऑनलाइन स्टोर पर विजिट जरूर कर रहे थें। ऐसे में ज्योति ने हौसला नहीं छोड़ा और साड़ियों की अच्छी अच्छी तस्वीरें लेकर उसे आकर्षक कैप्शन के साथ अपने ऑनलाइन स्टोर पर डालती रहीं। ऐसे में धीरे-धीरे कस्टमर आने शुरू हुए। पर जब कस्टमर आने लगे तो ज्योति के पास बाजार की प्रतिस्पर्धा से जूझने की समस्या आई और इसे भी ज्योति ने बेहद सूझ-बूझ के साथ हल किया। दरअसल, उन्होंने अपने हर एक कस्टमर को महत्व दिया, उसकी जरूरत को समझा और साथ ही उसके फीडबैक को गंभीरता से लेकर अपने बिजनेस के हर एक पहलु को सुधारा।

पहले साल में ही online saree business के जरिए बेंच डाली 15 लाख की साड़ियां

इस तरह से धीर-धीरे ही सही लेकिन ज्योति के ऑनलाइन साड़ी का बिजनेस (online saree business) चल पड़ा और पहले साल में उन्होनें लगभग 15 लाख की साड़ियां बेच डाली। इसके बाद जब बिजनेस बढ़ा तो उसे अकेले संभालने भी ज्योति के लिए मुश्किल आने लगी। ऐसे में उनके पति अपना बिजनेस छोड़ उनकी मदद करने लगे और साथ ही ज्योति ने शुरूआती दौर में एक लेडी असिस्टेंट भी रख लिया। पर बाद के सालों में बिजनेस इतना बढ़ गया फिर ज्योति घर के कमरे से शुरू हुए काम के लिए उन्हें अब रेंट पर ऑफिस लेना पड़ा।

आज Sanskriti Vintage का है सालाना 10 करोड़ रूपए का टर्न ओवर

बता दें कि आज नोएडा स्थित Sanskriti Vintage के दफ्तर में तकरीबन 30 लोग काम करते हैं, जिनमें साड़ियों की तस्वीरें अपडेट करने के लिए क्रिएटिव टीम से लेकर उसकी क्वालिटी चेक करने के लिए टीम तक काम करती है।इस तरह से एक हाउसवाइफ द्वारा घर के एक कमरे से शुरू हुआ बिजनेस देश के स्थापित साड़ी बिजनेस में से माना जाता है। जिसका सालाना टर्न ओवर लगभग 10 करोड़ हो चुका है।

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