धार्मिक

इस नवरात्रि बन रहा एक अशुभ संयोग, पूरे एक साल दुनिया में मचेगी उथल पुथल

इस साल नवरात्र 17 अक्टूबर (शनिवार) को शुरू हो रहे हैं। वहीं इसकी समाप्ति 25 अक्टूबर (रविवार) को हो रही है। इस बार आश्विन मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पड़ रही है जिसके चलते यह शारदीय नवरात्र होंगे। ऐसे में इस नवरात्र में सिर्फ 8 दिनों पूजा होगी जबकि 9वें दिन विसर्जन हो जाएगा। दरअसल इस बार पितृपक्ष और नवरात्र के मध्य एक माह का गेप पुरुषोत्तम मास के चलते आ रहा है। इस साल तुला संक्रांति के साथ नवरात्र का आरंभ हो रहा है। इन सबके चलते कुछ ऐसे संयोग बन रहे हैं जिन्हें लेकर ज्योतिषी भी चिंतित हैं।

दुनियाभर में होगी उथल पुथल

ज्योतिषियों की माने तो इस साल देश विदेश में काफी उथल पुथल हो सकती है। दरअसल मां प्रत्येक वर्ष नवरात्र पर अलग अलग वाहनों से आती हैं। देवी भगवती पुराण कि माने तो मां दुर्गा जिस वहां पर विराज होकर पृथ्वी पर आएंगे वह कई संकेत देता है। उदाहरण के लिए इस साल मां दुर्गा अश्व (घोड़े) पर विराजित होकर आएंगी और भैंसे पर बैठ वापस जाएंगी। वहीं चैत्र में जो नवरात्र आ रहे हैं उसमें भी मां अश्व पर बैठ आएंगी।

प्राकृतिक आपदाओं के भी है आसार

अब दोनों नवरात्रों पर मां का एक ही प्रकार के वाहन पर बैठ पृथ्वी आना शुभ संकेत नहीं है। घोड़ा पश्चिम दिशा का कारक माना जाता है, वहीं शनि पश्चिम दिशा के स्वामी हैं। नवरात्र भी शनिवार से शुरू हो रहे हैं। ऐसे में पश्चिमी देशों में प्राकृतिक आपदा, आंधी-तुफान, आतंकवादी गतिविधियां जैसी कई समस्याएं आ सकती हैं। कोरोना भी अपना विकराल रूप ले सकता है।

बेरोजगारी और मंहगाई बढ़ेगी

भारत में बेरोजगारी और मंहगाई जैसी समस्याएं बढ़ सकती है। वहीं अमेरिका और चीन के मध्य तनाव बढ़ सकता है। तुर्की और फ्रांस के संबंध भी खराब हो सकते हैं। साम्प्रदायिकता और युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है। इन सबका नकारात्मक असर भारत पर भी पड़ेगा।

भैंसे पर मां भगवती की वापसी नहीं है अच्छा संकेत

वहीं मां भगवती नवरात्र समाप्त होते ही भैंसे पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी। यह एक अच्छा संकेत नहीं माना गया है। इससे करीब एक साल तक देश में रोग और अर्थव्यवस्था को लेकर समस्याएं खड़ी हो सकती है। भारत चीन के रिश्ते भी बिगड़ सकते हैं।

इसके अलावा अभी राहू केतु की स्थिति भी ठीक नहीं चल रही है। इन सभी संयोगों के चलते यह एक साल भारत और दुनियाँ के पश्चिमी देशों के लिए बुरा जाने वाला है। गौरतलब है कि अभी कोरोना सब दूर कहर बरसा ही रहा है।

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