नैना देवी शक्तिपीठ में गिरी थी देवी सती की आंखें, मंदिर जाकर दूर हो जाते हैं दृष्टि दोष

नैना देवी 51 शक्तिपीठों में से एक है। नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है। मान्यता के अनुसार यहां पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। जब विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से सती मां के शरीर के टुकड़े किए थे। तब मां सती के शरीर के अंग, वस्त्र व गहनें धरती पर आ गिरे थे। मां सती के नैत्र जिस जगह पर गिरे थे, वहां पर नैना देवी मंदिर बनाया गया। कहा जाता है कि जो लोग यहां आकर मां की पूजा करते हैं, उनको आंखों के रोग से मुक्ति मिल जाती है।

श्री नैना देवी मंदिर महिशपीठ में से एक है। क्योंकि यहां पर मां श्री नयना देवी जी ने महिषासुर का वध भी किया था। इस मंदिर में एक पीपल का पेड़ है जो कि मंदिर का मुख्य आकषर्ण है। माना जाता है कि ये काफी पुराना पेड़ है और जो लोग इस पेड़ पर धागा बांधते हैं, उनकी कामना पूर्ण हो जाती है।

गर्भ ग्रह में हैं तीन मूर्तियां

मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही दो शेरों की प्रतिमाएं है। जबकि मंदिर के गर्भ ग्रह में तीन मुख्य मूर्तियां हैं। दाईं तरफ माता काली की, मध्य में नैना देवी की और बाई ओर भगवान गणेश की प्रतिमा है। इन तीनों मूर्तियों के दर्शन करने से मां की कृपा बन जाती है।

मंदिर से जुड़ी कहानी

नैना देवी मंदिर की महिमा से एक कहानी भी जुड़ी हुई है। कहानी के अनुसार नैना नाम का एक लड़का इस पहाड़ी पर अपने मवेशियों को चराने के लिए आया करता था। एक दिन उसने देखा कि जब भी उसकी गाए मंदिर परिसर में लगे पीपल के पेड़ के नीचे जाती। तो अपने आप ही उनके स्तनों से दूध निकलने लग जाता। ये चमत्कार देखने के बाद उसने सोचा कि जहां पर गाय खड़ी होती है, उस जगह गिरे पत्तों को हटाए जाए। पत्ते हटाने के बाद उसे एक पत्थर दिखाई दिया। जिसे उसने वहां ही छोड़ दिया। वहीं रात को उसे एक सपना आया जिसमें माता नैना देवी ने उससे कहा कि वो पत्थर उनका ही पिंड स्वरूप है। ये सपना आने के बाद लड़के ने राजा बीर चंद से मुलाकात की और उन्हें सब बताया। राजा ने लड़के की बात को मानते हुए उसी स्थान पर श्री नैना देवी नाम के मंदिर का निर्माण करवा दिया। मंदिर निर्माण में सफेद मार्बल का प्रयोग हुआ है और इसे भव्य तरीके से बनाया गया है।

नवरात्रि के दौरान होता है कार्यक्रम का आयोजन

नैना देवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता है। दूर-दूर से लोग मंदिर में आकर मां की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसाद चढ़ाते हैं। इसलिए आप भी नवरात्रि के दौरान नैना देवी मंदिर जरूर जाएं।

कैसे पहुंचे- नैना देवी मंदिर सड़क और रेल मार्ग के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर के पास कई सारी धर्मशालाएं और होटल भी मौजूद हैं। जहां पर आप रुक सकते हैं। दिसंबर और जनवरी के महीने में इस जगह काफी ठंड होती है। इसलिए अपने साथ गर्म कपड़े जरूर लेकर जाएं।

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