बॉयफ्रेंड के लिए करवा चौथ का व्रत रखना सही है या गलत? जानिए इससे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

सुहागन महिलाओं का सबसे बड़ा त्यौहार करवा चौथ आने वाला है और इन दिनों इसकी तैयारियां जोरो शोरों से की जा रही हैं। बता दें कि इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। वैसे आजकल अविवाहित लड़कियां भी अपने ब्वॉयफ्रेंड, मंगेतर और फ्यूचर हसबैंड के लिए ये व्रत रख रही हैं।

कुंवारी लड़कियां व्रत तो जरूर रखती हैं, मगर उनके मन में कुछ सवाल होते हैं जैसे क्या अविवाहितों को ये व्रत रखना चाहिए? ब्वॉयफ्रेंड के लिए व्रत रख सकते हैं? छलनी से चांद को क्यों देखा जाता है? निर्जला व्रत क्यों रखते हैं? अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल आते हैं तो आज हम इस आर्टिकल में आपके सारे सवालों का जवाब देंगे। आइये जानते हैं, करवा चौथ से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें…

क्या ब्वॉयफ्रेंड के लिए रख सकते हैं व्रत?

ज्योतिष बताते हैं कि अविवाहित लड़कियां भी अपने मंगेतर या ब्वॉयफ्रेंड के लिए ये व्रत रख सकती हैं। यही नहीं बल्कि कुंवारी लड़कियां जो किसी भी तरह के रिश्ते में नहीं हैं, वो भी इस व्रत को रख सकती हैं। इससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है, मगर पूजा पूरे विधि विधान के साथ करना चाहिए।

पूजा करने की विधि है अलग अलग

ज्योतिष बताते हैं कि  करवा चौथ का व्रत विवाहित और अविवाहित दोनों के लिए होता है, मगर दोनों के व्रत के नियम और पूजा पाठ करने की विधि अलग अलग है। अगर आप अपने ब्वॉयफ्रेंड या मंगेतर के लिए व्रत रख रही हैं तो निर्जला व्रत के बजाय निराहार व्रत रखें। इसके अलावा व्रत के बाद रात को चांद के दर्शन के साथ साथ शिव-पार्वती की आराधना भी जरूर करें, इससे मनचाहा वर मिलता है। वहीं विवाहित महिलाएं निर्जला व्रत रखें और रात को छलनी से चांद देखने के बाद ही भोजन ग्रहण करें।

जानिए क्यों देखते हैं छलनी से चांद?

करवा चौथ के कथा के अनुसार एक बार सात भाइयों की एक बहन को उसके भाइयों ने करवा चौथ के दिन छलनी से चांद दिखाने की बजाए दीपक दिखाकर भोजन करवा दिया था। जिससे उसका व्रत टूट गया। इसके बाद उसने पूरे साल चतुर्थी का व्रत किया और करवा चौथ के दिन पूरे विधि विधान के साथ व्रत किया, जिससे उसे सौभाग्य की प्राप्ति हुई। इसके पीछे एक दूसरा कारण ये है कि कोई छल से व्रत भंग न कर दे, इसलिए छलनी से बहुत ही बारीकी से चंद्रमा को देखा जाता है और व्रत खोला जाता है।

किसने रखा था सबसे पहले करवा चौथ का व्रत?

पौराणिक कथाओं के मुताबिक करवा चौथ का व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। माना जाता है कि इसी व्रत से माता पार्वती को अखंड सौभाग्यवती का वरदान मिला। इसके अलावा महाभारत के युद्ध में पांडवों के विजय के लिए द्रौपदी ने यह व्रत रखा था। बता दें कि करवा चौथ वाले दिन माता पार्वती की भी पूजा की जाती है।

देवाताओं की विजय के लिए देवियों ने रखा था व्रत

दूसरी कथा ये भी है कि जब देवताओं और राक्षसों का युद्ध हो रहा था तो देवताओं के विजय के लिए देवियों ने ये व्रत रखा था। माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं के पत्नियों को व्रत रखने के लिए कहा था। इसके बाद देवताओं की विजय हुई।

करवा के साथ गणेश की कथा सुनें…

मान्यता है कि कभी भी सिर्फ करवा चौथ की कथा नहीं सुननी चाहिए, इसके साथ भगवान गणेश की कथा अवश्य सुनें। इससे सुहागन महिलाओं को एक पत्नी और एक मां दोनों की शक्ति मिलती है।

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