करवा चौथ व्रत रखने से डरती हैं इस गांवों की महिलाएं, 600 साल पहले मिला श्राप है वजह

करवा चौथ का त्योहार हर साल धूमधाम से भारत में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और चांद को देखकर अपना व्रत तोड़ती हैं। उत्तर भारत में इस पर्व की काफी मान्यता है। इस दिन महिलाएं अच्छे से तैयार होकर करवा चौथ की कथा पढ़ती हैं और भगवान से पति की स्वस्थ की कामना करती हैं।

 

हालांकि हरियाणा राज्य में ऐसे गांव हैं, जहां पर करवा चौथ को नहीं मनाया जाता है। इन गांवों के लोगों की ये धारणा है कि इस व्रत को करने से पति की मौत हो जाता है। हरियाणा के करनाल जिले के औगंद, गोंदर व कतलाहेड़ी गांव में ये पर्व सदियों से नहीं मनाया जा रहा है। गांव में रहने वाले राजपूत समाज के चौहान वंश के अनुसार सदियों पहले गांव को श्राप दिया गया था। जिससे गांव मुक्त नहीं हो पाया है। श्राप की वजह से इन गांवों में करवा चौथ का व्रत नहीं रखा जाता है।

ग्रामीणों के मुताबिक लगभग 600 साल पहले राहड़ा की एक लड़की का विवाह गोंदर के एक युवक से हुआ था। विवाह के बाद लड़की अपने मायके गई थी। वहां करवा चौथ से एक रात पहले उसने सपने में देखा कि किसी ने उसके पति की हत्या कर दी है और उसका शव बाजरे के खेत में छिपा दिया है। उसने ये बात अपने मायके वालों को बताई और अगले दिन अपने परिवार वालों के साथ ससुराल गोंदर आ गई। घर पर उसे पति नहीं मिला। जिसके बाद ये लड़की सपने में आई जगह पर पति को खोजने लगी। इस जगह पर इसे पति मरा हुआ मिला।

कहा जाता है कि महिला ने उस दिन करवा चौथ का व्रत रखा था। इसलिए उसने घर में अपने से बड़ी महिलाओं को अपना करवा देना चाहा था। लेकिन उन्होंने अशुभ मानते हुए उससे करवा लेना से मना कर दिया। इससे नाराज होकर लड़की ने सबको श्राप दिया कि यदि भविष्य में इस गांव की किसी भी सुहागिन ने करवा चौथ का व्रत रखा, तो उसका पति मर जाएगा। तब से ही इन गांवों की सुहागिन महिलाओं ने ये व्रत रखना बंद कर दिया।

कतलाहेड़ी और औंगद गांव कुछ सालों बाद गोंदर गांव से अलग हो गए। लेकिन उनके वंशज गोंदर के थे। इसलिए यहां भी महिलाएं ये व्रत नहीं रखती हैं।

गौरतलब है कि करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इस व्रत से एक कथा जुड़ी हुई है। जो कि इस प्रकार है सत्यवान नाम का राजा था जिसकी पत्नी सावित्री थी। सत्यवान की मौत हो गई थी और यमराज उनके प्राण लेने के लिए आए थे। तब सावित्री ने यमराज से प्रार्थना की कि उनके पति को पुनर्जीवित कर दें। सावित्री की प्रार्थना को यमराज ने मान लिया और उनके पति को जिंदा कर दिया। जिसके बाद से सावित्री ने ये व्रत रखना शुरू कर दिया।

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