अहोई अष्टमी के व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना संतान को मिलेगा दुःख

हिंदू पंचांग के मुताबिक कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को अहोई माता का व्रत जाता है। ये व्रत महिलाएं अपने संतान के सुख, समृद्धि, खुशहाली और लंबी उम्र के लिए रखती हैं। जिस तरह से करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, उसी तरह से कार्तिक मास के कृष्णपक्ष के अष्टमी को महिलाएं अपने संतान के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

इस व्रत में महिलाओं को कई तरह के नियमों का पालन करना पड़ता है। जबकि स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को कुछ नियमों में छूट दी जाती है। बहरहाल आज हम आपको ये बताने वाले हैं कि आखिर अहोई अष्टमी के व्रत में महिलाओं को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गणेश भगवान की पूजा अवश्य करें

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की विशेष पूजा की जाती है, मगर प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करना न भूलें। सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें और उसके माता अहोई की विधिवत पूजा अर्चना करें। मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा पहले करने से किसी तरह की बाधा नहीं आती और पूजा सफलतापूर्वक संपन्न होती है। साथ ही आपका व्रत भी सफल रहेगा।

इन चीजों का करें परहेज

अहोई देवी का व्रत रखने से एक दिन पूर्व तामसीक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन आदि का सेवन कतई न करें। माना जाता है कि तामसिक भोजन से मन में निगेटिव विचार आते हैं। ऐसे में व्रत से पहले हमेशा सात्विक यानी सादा भोजन ही करना चाहिए। वेद,  शास्त्रों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि सात्विक भोजन से मन, वचन और कर्म में शुद्धता आती है। इस संबंध में कहा जाता है कि ‘जैसा अन्न वैसा मन’ इसका मतलब ये है कि जैसा आप भोजन करेंगे वैसे ही विचार आपके दिमाग में पैदा होंगे।

दिन के समय सोना गलत

अगर आप अहोई अष्टमी का व्रत रखने का सोच रहे हैं तो ध्यान रहे कि जिस दिन व्रत हो, उस दोपहर को न सोएं। इससे आपके व्रत रखने के उद्देश्यों भंग हो सकते हैं। ऐसे में दोपहर में सोने की बजाए मंदिर में बैठकर माता का ध्यान जरूर करें।

पुराने करवे का ना करें इस्तेमाल

अहोई अष्टमी के व्रत के दिन करवा चौथ में इस्तेमाल किए गए करवे का प्रयोग करना निषेध है। इसके लिए आप नए करवे का इस्तेमाल करें, नए करवे को ही शुभ माना जाता है।

लहसुन तथा प्याज से करें परहेज

अहोई अष्टमी का व्रत खोलन के बाद लहसुन प्याज वाला भोजन न करें बल्कि सात्विक भोजन ही खाएं क्योंकि व्रत खोलने के बाद तामसिक भोजन का इस्तेमाल करना निषेध माना गया है।

कांसे के बर्तन का इस्तेमाल ना करें

व्रत के पूजा के दौरान कांसे के बर्तन का इस्तेमान बिल्कुल न करें। कांसे के बर्तन के बजाए तांबा, पीतल या स्टील के बर्तनों का प्रयोग करें।

ना पहनें इस रंग के कपड़े

महिलाएं अहोई अष्टमी के व्रत के दिन काले रंग का कपड़ा न पहनें। पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े के बजाए, लाल, पीला या हल्का रंग का कपड़ा पहनें।

खुद को रखें पॉजिटिव

व्रत वाले दिन खुद को पॉजिटीव रखें और किसी के लिए भी मन में नकारात्मक विचार आने ना दें। साथ ही शुभ मुहूर्त पर अहोई माता की पूजा करें और पूजा के बाद रात को तारों को अर्घ्य दें।

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