20 नवंबर को होगा शनि और गुरू मिलन, इन उपायों से खुल जाएगी आपकी किस्मत

नवंबर का महीना इस बार त्यौहारों का महीना है। इस महीने में करवा चौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दिवाली, छठ पूजा गोवर्धन पूजा जैस कई बड़े त्यौहार मनाए जाएंगे। ऐसे में इन दिनों पूरे देश में त्यौहारों की धूम मची हुई है और हर कोई इस त्यौहारी सीजन को सेलिब्रेट करने की तैयारी कर रहा है। खैर, नवंबर का महीना त्यौहारों की वजह से तो खास है ही, साथ ही कुछ ज्योतिषीय संयोग भी ऐसे बन रहे हैं, जो आपके किस्मत का कायापलट कर सकते हैं।

जी हां, शनि और गुरू ग्रह के संयोग से आपकी किस्मत पलट सकती है। बता दें कि दीपावली (16 नवंबर) के ठीक 4 दिन बाद यानी 20 नवंबर को गुरू और शनि का विशेष योग बन रहा है। मालूम हो कि शनि इस समय मकर राशि में विराजमान हैं और 20 नवंबर को गुरू भी मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे।

ज्योतिष विद्वानों की मानें तो गुरू और शनि का योग बेहद अहम है और यह मिलन सुखद संबंधों को दर्शाता है। ज्योतिष के अनुसार गुरू और शनि का एक दूसरे से किसी प्रकार का कोई बैर नहीं है, यानी ये एक दूसरे को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। बल्कि शनि, गुरू का बेहद सम्मान करते हैं। एक तरफ जहां शनि को कर्मों का देवता कहा जाता है तो वहीं गुरू आपको अच्छे कर्मों का फल देते हैं। गुरू ही आपके करियर की दशा-दिशा तय करते हैं। बता दें कि ये संयोग 5 अप्रैल तक जारी रहेगा। ऐसे में आपको लाभ पाने के लिए कुछ खास उपाय जरूर करने चाहिए। आइये जानते हैं, क्या हैं वे खास उपाय…

पीपल की पूजा करें…

पीपल की पूजा

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले पीपल की विधि विधान से पूजा करने से शुभ पल की प्राप्ति होती है। इसके लिए आपको शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और किसी पीपल के पेड़ के पास जाकर पूजा अर्चना करें। ऐसा करेंगे तो शनिदेव की विशेष कृपा होगी और आपके आपके अच्छे कर्मों का फल जरूर मिलेगा।

शनि स्त्रोत का पाठ करें…

शनिदेव

20 नवंबर के बाद एक शनिवार से शुरू करके लगातार 11 शनिवार तक 108 बार शनि स्त्रोत का पाठ करें। ऐसा करने से आपको शनि की दशा में राहत मिलती है, साथ ही अच्छे फलों की प्राप्ति भी होती है। वैसे शनि स्त्रोत का पाठ हर शनिवार करने से शनि महाराज की कृपा बनी रहती है।

शनिदेव को अर्पित करें तेल 

सरसों का तेल

आपको बता दें कि शनि महाराज को तेल अति प्रिय है। यही वजह है कि शनि मंदिर में तेल चढ़ाया जाता है। ऐसे में अगर आप शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएंगे तो आपको कष्टों से मुक्ति मिलेगी और सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी। अगर आप शनि और गुरू के इस मिलन के समय में लगातार 43 दिनों तक शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएंगे तो आपको विशेष लाभ की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही शनि महाराज आपके सभी गलतियों को क्षमा भी कर देंगे और आपको जल्द ही आपके अच्छे कर्मों का फल मिलने लगेगा।

प्रत्येक शनिवर को करें ये काम 

काला कुत्ता

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक प्रत्येक शनिवार को काली गाय, काले कुत्ते और काली चीड़िया को दाना जरूर डालें। ऐसा करने से आपके घर की नाकारात्मक उर्जा खत्म होती है, साथ ही आपको करियर में सफलता मिलती है। अगर आप शनिवार को किसी शुभ काम के लिए घर से बाहर जा रहे हैं तो घर से निकलते समय किसी काले कुत्ते को दाना डाल दें, आपका काम सफलतापूर्वक सिद्ध होगा। इसके अलावा अगर शनिवार को मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएंगे तो आपके कुंडली की शनि दशा सुधरेगी और आपको लाभ प्राप्त होगा और आपके बिगड़े हुए काम बनने लगेंगे।

ऐसे दूर करें शनिदोष

श्रीराम भक्त हनुमान

शनिदोष दूर करने के लिए प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी होती है। अगर आप शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती से परेशान हैं तो हर रोज हनुमान की आराधना जरूर करें। इसके अलावा आपको मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। इससे शनि दोष दूर होता है और आपको लाभ मिलने लगता है। साथ ही मंगलवार या शनिवार को अपने पास के हनुमान मंदिर में जाकर सिंदूर का चोला चढ़ाएं, विशेष लाभ मिलेगा।

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