धार्मिक

ये 5 सबूत साबित करते हैं की श्री राम का जन्म और रामायण बिल्कुल सत्य थी, खुद देख लिजिए

हिंदी टेलीविजन के इतिहास में जब भी किसी खास टीवी सीरीज की बात की जाती है तो रामानंद सागर की ‘रामायण’ का नाम सबसे पहले नंबर पर आता है। 1987 में टीवी पर प्रसारित होने वाले रामानंद सागर का ‘रामायण’ उस दौरान सबसे बड़ा सीरियल माना जाता था। लेकिन, रामयण और महाभारत जैसी घटनाओं पर अक्सर लोग उंगली उठाते रहे हैं। धर्म पर आस्था रखने वालों के लिए रामायण और महाभारत जैसी घटनाएं सत्य हैं तो वहीं कुछ लोगों के लिए यह एक कोरी कल्पना है। इसलिए आज हम रामायण के सत्य होने के ठोस सबूत आपके सामने रखेंगे जो ये साबित करते हैं कि रामायण की घटना कोई काल्पनिक नहीं थी। बल्कि बिल्कुल सत्य थी।

रामायण के सत्य होने के ठोस सबूत ये हैं

अक्सर रामायण के पात्रों और उसकी घटना पर ऊँगली उठाती रही है। रामायण और महाभारत जैसी घटनाओं से हिन्दुओं की आस्था जुडी हुई है और लोग इसे पवित्र घटना के रूप में याद करते हैं। लेकिन, जब कुछ लोग इसपर उंगली उठाते हैं तो हिन्दु समाज को काफी दुख होता है। हिन्दू धर्म में राम की पूजा की जाती है और उन्हें एक आदर्श पुरुष माना जाता है। ऐसे में जब रामायण की सत्यता पर उंगली उंठती है तो लोगों में गुस्सा आना स्वाभाविक है। इसलिए आज हम आपके सामने रामायण के सत्य होने के ठोस सबूत पेश करने वाले हैं। जिससे ये साबित होता है कि श्री राम का जन्म हुआ था और रामायण में लिखी एक एक बार सत्य है।

अशोक वाटिका

रामायण में अशोक भाटी का जिक्र किया गया है। अशोक वाटिका रावण का सबसे गुप्त स्थान था। रायायण में अशोक वाटिका का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि रावण ने मां सीता को इसी स्थान पर बंदी बनाकर रखा था। यह एक रहस्यमयी स्थान था जिसे ढूँढना हनुमान जी के लिए भी काफी मुश्किल रहा। आपको बता दें कि आज भी अशोक वाटिका श्रीलंका में मौजूद है।

हनुमान जी के पद चिन्ह

ये बात तो हम सभी जानते हैं कि हनुमान जी विशाल रुप धारण कर सकते थे। उस वक्त हनुमान जी ही थे जो भगवान राम के कहने और उन्हें अपना बल याद दिलाने पर विशाल रुप धारण किया था। हनुमान जी के विकराल रूप धारण करने के बाद उन्होंने अथाह समुद्र को पार किया और लंका गए। आज भी उसी स्थान पर उनके पद चिन्ह मौजूद हैं।

गर्म जल के कुएं

आपको बता दें कि रावण ने अपनी दानवीय शक्तियों से लंका में गर्म जल के कुएं बनवाये थे। ये कुएं आज भी लंका में मौजूद है और इनसे गर्म पानी निकलता है।

राम सेतू

रामसेतु को लेकर हाल ही में नासा ने रिसर्च किया था। नासा ने भी इस बात की पुष्टी की थी की समुन्द्र में जिस स्थान पर राम सेतू के मौजूदग होने की बात की जाती है वहां वैसा ही सेतू संमुद्र में आज भी मौजूद है। हालांकि, कुछ लोग इसे कुदरत का करिश्मा मानते हैं। लेकिन, इसकी मौजूदगी साबित करती है कि राम सेतू आज भी मौजूद है।

तैरते पत्थर

पानी पर पत्थर का तैरना कोई आम बात नहीं है। लेकिन, रामायण में जैसा कि जिक्र किया गया है कि राम जी की सेना ने पूल बनाने के लिए जो पत्थर समुद्र में फेंके वो तैरने लगे थे। आपको बता दे कि आज भी कुछ पत्थर रामेश्वरम, दक्षिण भारत में मौजूद हैं, जो पानी पर तैरते हैं।

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