धार्मिक

छठ पूजा : भूलकर भी न करें ये 7 गलतियाँ, वरना छठी मैय्या हो सकती हैं नाराज

लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की शुरूआत नहाय खाय के साथ हो चुकी है। इस महापर्व की धूम 4 दिनों तक रहेगी यानी 21 नवंबर को उगते सूरज को अर्घ्य देने के बाद इसकी समाप्ति होगी। खैर, छठ पर्व का विशेष महत्व मत्स्य पुराण और नारद पुराण में भी बताया गया है और यह पिछले करोड़ों वर्षों से मनाया जा रहा है। इसमें छठ मैय्या की विधि विधान से पूजा की जाती है और कुछ नियमों का पालन भी किया जाता हैै।

पुराणों में इस बात का उल्लेख है कि छठ मैय्या बहुत उदार हैं और वह अपने भक्तों पर बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। वहीं अगर व्रती कुछ गलतियां करती हैं, तो बहुत जल्दी नाराज भी हो जाती हैं। छठी मैय्या का अगर विशेष आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो पूजा में विशेष ध्यान रखना चाहिए। तो आइये जानते हैं, वो कौन सी गलतियां है, जो छठ पर्व में करने से बचना चाहिए…

पवित्रता का रखें विशेष ध्यान 

छठी मैय्या के पूजा के दौरान पवित्रता का विशेष ख्याल रखें। पूजा में शामिल होने वाले चीजों को जूठे हाथों से न छूएं, साथ ही छठ पूजा में शामिल होने वाले सामानों को एक जगह इकट्ठा करके रखें और इन्हें गंदे हाथों या बिना नहाए न छूएं। ऐसे में इन सामानों को बच्चों से दूर और सुरक्षित स्थानों पर ही रखना चाहिए।

खंडित फल न चढ़ाएं

छठ महापर्व में ये मान्यता है कि आप जो भी फल छठी मैय्या को चढ़ाते हैं, वो जुठलाया हुआ या खंडित ना हो। अगर पेड़ों पर फले हुए फलों और फूलों का प्रयोग करते हैं, तो ध्यान रहे कि इन्हें पशु पक्षियों द्वारा जुठलाया न गया हो। फल फूल हमेशा साफ और शुद्ध होने चाहिए, ऐसे ही फल छठी मैय्या के व्रत में प्रसाद के रूप में भेंट किया जाता है।

व्रत रखकर ही बनाएं प्रसाद 

छठी मैय्या का प्रसाद सिर्फ वही बनाएं, जो व्रती हों। ऐसा करने से छठी मैय्या का विशेष आशीर्वाद मिलता है। छठ के एक गीत मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए। ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई न सहाय। इसका अर्थ ये है कि एकबार सुगवा यानी तोता ने छठ पूजा में शामिल होने वाले नारियल को जूठा कर दिया था, तो उसे धनुष से मार दिया गया था। इसके बाद जब सुगमी तोता के लिए छठ का व्रत रखती है और छठी मैय्या प्रसन्न होकर तोता को पुनः जीवित कर देती हैं। इस पर्व में इस गाने के द्वारा पवित्रता और शुद्धता का वर्णन किया गया है।

नहाय-खाय से छठ तक न खाएं ये चीजें…

4 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में जो व्रती होते हैं, वे तो सिर्फ फलाहार ही करते हैं। इसके अलावा जो व्रत नहीं रखते हैं, उनको भी लहसुन प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि सिर्फ सात्विक भोजन ही करना चाहिए। अगर संभव हो तो इन चार दिनों में लहसुन प्याज घर में ही ना रखें। ऐसा इसलिए क्योंकि इसे तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा जाता है और किसी भी व्रत त्योहार में इसका प्रयोग वर्जित माना गया है।

छठ व्रती यहां न सोएं…

छठ पूरी तरह से साधना का पर्व है। ऐसे में छठी मैय्या के व्रतियों के लिए एक नियम ये भी है कि इन्हें बैड, गद्दा या पलंग पर नहीं सोना चाहिए। संभव हो तो व्रती नीचे जमीन पर ही एक दरी बिछाकर सोएं, ऐसा करने से छठी मैय्या सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। साथ ही शारीरिक और मानसिक रूप से भी इसका सकारात्मक असर पड़ता है।

इस तरह के डालों का करें प्रयोग…

छठ पूजा में हमेशा नए डाले और बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए। इस पूजा में शामिल होने वाली हर चीज नई होनी चाहिए। अगर धातु के बर्तन हैं, तो उन्हें अच्छे से साफ करके दोबारा प्रयोग में ला सकते हैं, मगर डाले हमेशा नए ही खरीदें।

प्रसाद चढ़ाते समय ध्यान रखें ये चीज…

प्रसाद चढ़ाते समय इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि छठ का प्रसाद अपने मन से न बढ़ाएं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि एक बार अगर जिन चीजों को आप चढ़ा देते हैं, तो फिर उसे हर साल चढ़ाना पड़ता है।

Related Articles

Back to top button