बॉलीवुड

12 वर्ष से दर्द से तड़प रहा था शख्स, आखिर थक हारकर सोनू को किया फोन, फिर जो हुआ…

बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की इस तरह से मदद की कि वे उनके लिए मसीहा कहलाने लगे। छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले अमन 12 वर्षों से नसों की एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इस बीमारी का नाम था क्रेनियल वर्टेब्रल जंक्शन। उनकी हालत ऐसी थी कि वे सीधे हाथ से कुछ पकड़ भी नहीं पाते थे। गर्दन के पिछले हिस्से में उन्हें इतना दर्द होता था कि उसे बर्दाश्त करना भी मुश्किल हो जाता था। ठीक से बैठ भी नहीं पाते थे।

अमन के पिता दलजीत एक ऑटो चालक हैं। ऑपरेशन जब सफल नहीं हुआ तो इलाज के लिए चेन्नई भी गए, लेकिन खर्च इतना था कि इनका हौसला ही टूट गया। बड़ा ही संकोच करके सोनू सूद को ट्वीट किया। उम्मीद नहीं थी उन्हें कि वहां से कोई जवाब आएगा, लेकिन सोनू सूद की टीम ने उनसे संपर्क करके बिना किसी शुल्क के उनकी सर्जरी करवा दी।

‘खत्म ही समझो अपनी तकलीफ’

सोनू सूद को दूसरी बार अमन ने झिझकते हुए फोन किया था, मगर इस बार जब सोनू सूद ने उन्हें कहा कि अपनी तकलीफ खत्म ही समझो तो यह सुनकर अमन बहुत ही भावुक हो गए थे, क्योंकि उन्हें भरोसा ही नहीं हो रहा था कि उनकी बात सोनू सूद से हो रही है। अमन के पिता ने कहा कि सोनू सूद की वजह से उनके बेटे को दूसरी जिंदगी मिली है।

धनबाद की भी लगभग 50 लड़कियों के लिए सोनू सूद मसीहा बनकर ही सामने आए। लॉकडाउन के दौरान धनबाद की इन लड़कियों की नौकरी जा रही थी। किसी तरीके से नौकरी करके और कुछ काम-धंधा करके ये अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी कमा रही थीं, लेकिन अब इनके लिए बड़ा संकट पैदा हो गया था।

सोनामुनी को इसी दौरान सोनू सूद के बारे में पता चला कि वे जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। झिझकते हुए उन्होंने सोनू सूद को ट्वीट करके बताया कि काम बंद होने की वजह से 50 लड़कियां बहुत ही परेशान हैं और स्थिति ऐसी हो गई है कि उनके पास अब खाने के लिए भी लगभग कुछ नहीं रह गया है। उम्मीद तो नहीं थी, लेकिन सोनू सूद का जवाब उनके पास आ गया।

मिल गया रोजगार

उन्होंने साफ लिखा था कि एक सप्ताह के अंदर हमारी ये 50 बहनें जरूर नौकरी कर रही होंगी। यह मेरा वादा है। प्रवासी रोजगार के तहत सोनू सूद की वजह से गरीब लड़कियों को मामूली नौकरी ही मिली, पर कम-से-कम उनकी समस्या तो खत्म हो ही गई। एक बार फिर से उनकी जिंदगी खुशियों से सराबोर हो गई।

करवा दिया अर्जुन का ऑपरेशन

इसी तरह से महाराष्ट्र के ठाणे के रहने वाले 23 साल के फुटबॉलर अर्जुन के पैर में जो चोट लगी थी, वह घुटने तक पहुंच गई थी। अर्जुन बहुत गरीब थे। पिता थे नहीं। कॉल सेंटर में काम करके किसी तरह जिंदगी गुजार रहे थे और मां-बहन की देखरेख कर रहे थे। इसी बीच उनके चचेरे भाई शंकर ने सोनू सूद को ट्वीट करके इसके बारे में बता दिया। उम्मीद के विपरीत सोनू सूद की टीम ने उनसे संपर्क किया और करनाल में उनका सफल ऑपरेशन भी करवा दिया।

लगवा दिया पैर

इंदौर से कैलादेवी जाने के दौरान देवास के रहने वाले दीपेश गिरी एक बाइक दुर्घटना में अपना एक पैर गंवा बैठे। गरीबी की वजह से कृत्रिम पैर लगवाना उनके लिए मुश्किल था, लेकिन सोनू सूद को ट्वीट करने पर उन्होंने एक समाजसेवी संस्था के खाते में 25 हजार रुपये भिजवा कर उनकी कृत्रिम टांग लगवाने में मदद कर दी। इस तरह से दीपेश गिरी एक बार फिर से चल सके।

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