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छिन गई इन 6 लोगों की शाही घरानों वाली आलीशान जिंदगी, अब आपकी और हमारी तरह जीने को हैं मजबूर

छोटे-बड़े कई राजवाड़े हमारे देश में हुआ करते थे, लेकिन अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान इनमें से कई दिवालिया हो गए। कई ऐसे रहे, जिन्होंने आजादी के बाद अपनी शानो-शौकत खो दी। इन राजघरानों की ताकत और पैसे धीरे-धीरे कम होते चले गए। अब ये आमजनों की तरह जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं।

निजाम उस्मान अली खान के वंशज


उस्मान अली खान हैदराबाद के आखिरी निजाम रहे थे। वे 17 अरब 49 करोड़ 80 लाख 7 हजार 600 की संपत्ति के मालिक थे। इस तरह से दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में साल 2012 में ये छठे स्थान पर थे। उस्मान अली, जिनकी 16 बेटियां और 18 बेटे थे, उनके राजकुमार मुकर्रम जहां तुर्की में आजकल रहे हैं।

ऐसा कहा जाता है कि 70 साल पहले लंदन बैंक में जो 36 मिलियन पाउंड यानी कि 3 अरब 55 करोड़ 96 लाख 29 हजार 702 रुपये जमा किए गए थे, उस रकम को पाने के लिए उनके 120 वंशज इन दिनों अदालत में लड़ाई लड़ रहे हैं।

नवाब वाजिद अली शाह के वंशज

अलीगढ़ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के तौर पर सेवा दे चुके डॉ कौकब कुदर मिर्जा का बीते सितंबर में कोरोना से निधन हो गया था। वे अवध के नवाब वाजिद अली शाह के पोते थे। कोलकाता में वे एक छोटे से घर में रह रहे थे। इनके पीछे इनकी पत्नी और 6 बच्चे रह गए हैं।

त्रावणकोर के वंशज

देश जब आजाद हो गया तो इसके बाद भारत में त्रावणकोर का विलय हुआ था। उस वक्त वह हैदराबाद के बाद भारत का दूसरा सबसे अमीर राजघराना हुआ करता था। इस शाही परिवार के आखिरी मुखिया उथराडोम तिरुनल मार्तंड वर्मा थे। साथ में पद्मनाभस्वामी मंदिर के ट्रस्ट के अध्यक्ष की भी जिम्मेवारी वे संभाल रहे थे।

ऐसी मान्यता है कि हजारों करोड़ रुपये का सोना इस मंदिर में मौजूद है और यह भगवान की ही संपत्ति है। जब मार्तंड वर्मा ने वर्ष 2011 में दुनिया को अलविदा कह दिया, तो इससे पहले उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा यही जताई थी कि सारा सोना ईश्वर का है और यही परंपरा आगे भी जारी रहनी चाहिए। उनके परिवार की कभी इसमें कोई रुचि नहीं रही है।

टिगरिया वंश के महाराज ब्रजराज महापात्रा

एक जमाना था, जब महाराज ब्रजराज महापात्रा की गजब की शान-शौकत हुआ करती थी। उनके पास एक आलीशान महल हुआ करता था। हाथी-घोड़े और 25 विंटेज कारें भी उनके पास थीं। हालांकि, देश को जब आजादी मिली, तो इसके बाद भारत में इनकी रियासत का विलय हो गया।

इसके बाद इन्हें हर साल कुछ हजार रुपए की पेंशन दी जाने लगी। इनकी पत्नी विधायक रही थीं, लेकिन पहले ही वे बच्चों के साथ इन्हें छोड़ कर चली गई थीं। इसलिए महाराज ब्रजराज महापात्रा के अंतिम दिन तन्हाई और गरीबी में ही बीते थे।

टीपू सुल्तान के वंशज

अंग्रेजों के साथ युद्ध में टीपू सुल्तान जब मर गए थे, तो उसके बाद अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान के खजाने को अपने कब्जे में ले लिया था। ऐसा कहा जाता है कि ब्रिटिश अधिकारियों को टीपू सुल्तान के खजाने को ढोने के लिए 6 बैलगाड़ियों की जरूरत पड़ी थी।

टीपू के वंशजों यानी की बड़ी बेटी फातिमा बेगम को अंग्रेजों ने कोलकाता शिफ्ट कर दिया था। कोलकाता में ही टीपू सुल्तान के परिवार के लोग आजकल रह रहे हैं। कोई रिक्शा चलाते हैं। कोई साइकिल की मरम्मत करते हैं, तो कोई दर्जी का काम करके अपनी जिंदगी बिता रहे हैं। मिट्टी और घास-फूस के घर में ही ये रह रहे हैं।

मुगल बादशाह बहादुर शाह के वंशज

वर्तमान में कोलकाता में दो कमरों वाले एक छोटे से घर में सुल्ताना बेगम रह रही हैं, जो कि मुगल बादशाह बहादुर शाह के पोते की बीवी हैं। ऐसा बताया जाता है कि इससे पहले वे एक चाय की दुकान चला रही थीं, जिसकी जानकारी होने पर राज्य सरकार ने उन्हें 6000 रुपये महीने पेंशन देना शुरू कर दिया। एक आम इंसान की तरह सुल्ताना बेगम जिंदगी गुजार रही हैं। इनकी पांच बेटियां और एक बेटे हैं।

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