अजब ग़जब

पापा की बारात में शामिल हुआ सात महीने का बच्चा, मम्मी-पापा ने दूल्हा-दुल्हन बन लिए सात फेरे

उत्तर प्रदेश में एक बच्चा बारात में शामिल होकर अपनी मां की शादी में गया है और अपने माता-पिता का विवाह करवाया। ये मामला गोरखपुर के सूरजकुंड क्षेत्र की माधवपुर बंधा कॉलोनी का है। खबर के अनुसार मोहित साहनी नामक व्यक्ति अपने बेटे के साथ बारात लेकर उसकी मां जूही कन्‍नौजिया के घर गया। जहां पर मोहित साहनी व जूही कन्‍नौजिया ने विवाह किया। दरअसल मोहित साहनी व जूही कन्‍नौजिया ने साल 2018 में कोर्ट मैरिज की थी। कोर्ट मैरिज से दोनों के परिवार वाले खुश नहीं थे। लेकिन सात महीने पहले ही जूही कन्‍नौजिया ने एक बच्चे के जन्म दिया। जिसके बाद दोनों के परिवार वालों ने इनकी शादी करवाने का फैसला किया और 15 दिसंबर को इनका विवाह धूमधाम से करवाया गया।

इस दौरान इनका सात माह का बच्चा भी विवाह में शामिल हुआ और अपने मां-बाप के सात फेरों का साक्षी बना। साल 2017 में एक विवाह समारोह में मोहित साहनी व जूही कन्‍नौजिया की मुलाकात हुई थी। यहां से दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई। बातचीत का सिलसिला बढ़ता गया और ये दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे। दोनों के प्यार में जाति बाधा बन रही थी और इन्हें पता था कि इनके परिवार वाले कभी भी इनकी शादी नहीं होने देंगे। ऐसे में इन दोनों ने मई 2018 में रजिस्‍ट्रार के सामने कोर्ट मैरिज कर ली।

परिवार वालों ने इनकी शादी को मानने से इंकार कर दिया और इन्हें घर से निकाल दिया। जिसके बाद मोहित और जूही दिल्ली चले गए और एक साथ रहने लगे। इस बीच जूही के पिता ने थाने में केस भी दर्ज करवा दिया। हालांकि सात महीने पहले जूह मां बनी और एक बेटे को जन्म दिया। जिसका नाम आशुतोष रखा गया। बेटे के जन्म के बाद मोहित और जूही के परिवारों की नाराजगी कम होती गई। दादा-दादी, नाना-नानी ने आशुतोष की खातिर मोहित और जूही को अपना लिया।

गीताप्रेस के पूर्व कर्मचारी मोहित के पिता संतबली साहनी चाहते थे कि वो धूमधाम से अपने बच्चे की शादी करवाएं। इसलिए उन्होंने अपने बेटे और बहू की शादी करवाने का फैसला किया। जिसके बाद दोनों परिवार के लोगों ने मोहित और जूही की शादी वैदिक रीति रिवाज से करवाई। इस दौरान कई रिश्तेदार भी शामिल हुए, जिन्होंने इनको आशीर्वाद दिया। मोहित के पिता संतबली के अनुसार बच्चों ने भले ही अपनी मर्जी से शादी कर ली है। लेकिन वैदिक रीति का निर्वहन जरूरी था। इसीलिए 15 दिसंबर को रीति-रिवाज के साथ शादी कराई गई।

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