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कोरोना काल में निभाया फर्ज, साइकिल चलानी सीखी, जर्जर रास्ता, नदी पार कर निभाई अपनी ड्यूटी

कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया ही प्रभावित हो चुकी है। काफी लंबे समय से कोरोना महामारी ने देश को लोगों को काफी परेशान कर रखा है। कोविड-19 के कारण लोगों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। सरकार द्वारा कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं परंतु दिन पर दिन मामला गंभीर होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में सभी लोगों को यही हिदायत दी जा रही है कि वह अपने घर में ही ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करें। बिना किसी वजह के बाहर ना जाएं। अब लोगों को वैक्सीन का इंतजार है।

कोरोना महामारी की वजह से लॉक डाउन के कारण देश भर के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को नियमित टीका नहीं लग पाया था। सरकार के लिए यह विषय काफी गंभीर बना हुआ था। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए टीकाकरण कार्यक्रम को तेज करने की दिशा में कदम उठाया। एक आंकड़े के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय और यूनिसेफ अगस्त महीने तक 1.2 करोड़ बच्चों का टीकाकरण कर चुके।

टीकाकरण कार्यक्रम को संभव बनाने के पीछे स्वास्थ्य कर्मियों की कठिन मेहनत है। संकट की इस घड़ी में देशभर में टीका लगाने वाले 2 लाख लोगों के नेटवर्क वाले स्वास्थ्य कर्मियों ने कठिन मेहनत की है। कोरोना काल में सभी टीकाकरण को सफल बनाने के लिए यह स्वास्थ्यकर्मी हर मोर्चे पर डटे रहे। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से कुछ ऐसे स्वास्थ्य कर्मचारियों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिन्होंने विषम परिस्थितियों में मिसाल पेश की है।

बिहार के रामेश्वर प्रसाद पैदल चले, साइकिल चलाई, नदी पार कर निभाई ड्यूटी

सबसे पहले हम रामेश्वर प्रसाद की बात करते हैं। आपको बता दें कि यह बिहार के रहने वाले हैं। रामेश्वर प्रसाद ने गया जिले के भीतर इलाकों में जाने के लिए साइकिल का सहारा लिया। इतना ही नहीं बल्कि यह कई किलोमीटर तक पैदल भी चले थे। कभी कभी तो उनको अपनी सेवाओं को पहुंचाने के लिए नदियां भी पार करनी पड़ी थी। कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन के चलते जिन बच्चों को नियमित टीका नहीं मिल पाया था उन्होंने वहां तक यह सुविधा पहुंचाई।

नजीता बेगम दुर्गम रास्तों से होकर गांव-गांव तक पहुंचीं

आपको बता दें कि नजीता बेगम कर्नाटक के लिंगसुगुर तालुका में नर्स हैं। करोना काल में इन्होंने अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी के साथ निभाया। अपनी ड्यूटी निभाने के लिए यह दुर्गम रास्तों से होकर गांव गांव तक पहुंची थीं। इनका यही लक्ष्य था कि कोई भी घर बाकी ना रह जाए। अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए नजीता बेगम ने नदी, पहाड़ों, जंगलों, जर्जर रास्तों का सफर पैदल ही तय किया। कभी-कभी इन्होंने यह सफर निजी वाहनों के माध्यम से भी पूरा किया था। जब सरकार ने टीका कार्यक्रम की दिशा में कदम उठाया तो इन्होंने एक दिन भी आराम नहीं किया और पूरी निष्ठा के साथ उन्होंने अपनी ड्यूटी पूरी की।

औरंगाबाद की मुन्नी बाला सुमन ने 3 दिन में साइकिल चलानी सीखी

औरंगाबाद की मुन्नी बाला सुमन अपनी ड्यूटी के प्रति पूरी तरह से समर्पित थीं। कोरोना वायरस में लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी पर पहुंचने के लिए इन्होंने सिर्फ 3 दिनों में ही साइकिल चलाना सीख लिया। आपको बता दें कि मुन्नी बाला सुमन नवीननगर रोड में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बतौर नर्स काम करती हैं। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं, कोरोना महामारी की वजह से लॉक डाउन का जब ऐलान किया गया था तो सारे पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद कर दिए गए थे। ऐसी स्थिति में मुन्नी बाला सुमन शुरुआती दिनों में करीब 20 दिन तक पैदल ही जाया करती थीं। बाद में उन्होंने बाजार से 4600 की एक साइकिल खरीद ली और 3 दिन में इसको चलाना सीखा।

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