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रामायण बनाने वाले रामानंद सागर ने कभी बेचा साबुन तो कभी किया चपरासी का काम, ऐसी थी इनकी जिंदगी

कोरोना वायरस की वजह से देशभर में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया था जिसकी वजह से सभी लोग अपने घरों में ही बंद थे। ऐसी परिस्थिति में लोगों को अपने घर के अंदर समय काटना काफी मुश्किल हो रहा था तो इसी बीच रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण दूरदर्शन के नेशनल चैनल पर शुरू किया गया। लॉकडाउन के दौरान सभी लोगों ने रामायण देखा। लॉकडाउन में रामानंद सागर लोगों के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं थे। भले ही रामायण के जरिए सभी लोगों ने रामानंद सागर को बहुत प्यार दिया लेकिन क्या आप लोगों को पता है कि रामायण के जरिए अनूठा इतिहास रचकर सभी लोगों की जिंदगी में रस घोलने वाले रामानंद सागर का जीवन बहुत तकलीफों से भरा रहा था।

आजकल के समय में रामानंद सागर जी को हर कोई जानता है और सभी लोग इनका नाम बहुत सम्मान के साथ लेते हैं। रामानंद सागर जी ने अपने जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं परंतु रामायण के निर्देशन के बाद उन्हें इतनी प्रसिद्धि हासिल हुई है कि उन्हें पूरे जीवन में तो क्या, भारत में किसी और निर्देशक को आज तक नहीं मिली होगी। आज हम आपको रामानंद सागर जी के जीवन के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

आपको बता दें कि रामानंद सागर जी का जन्म 29 दिसंबर 1917 को भारत के लाहौर जिले के असलगुरु में हुआ था। रामानंद सागर जी के परदादा कई दशक पहले लाहौर से कश्मीर आकर बस गए थे। सारी दुनिया उन्हें रामानंद सागर के नाम से जानती हैं परंतु बहुत कम लोगों को इस बात का पता होगा कि रामानंद सागर जी का असली नाम चंद्रमौली चोपड़ा था। जब उनकी नानी ने उन्हें गोद ले लिया तो उनका नाम बदलकर रामानंद सागर रख दिया। रामानंद सागर बहुत धनवान परिवार से ताल्लुक रखते थे परंतु जब विभाजन हुआ तो रामानंद सागर के परिवार वाले अपना सारा बिजनेस, प्रॉपर्टी छोड़कर कश्मीर आ गए थे। बस यहीं से रामानंद सागर के परिवार के मुफलिसी और तकलीफों से भरा समय आरंभ हो गया।

रामानंद सागर ने अपना जीवन बहुत ही गरीबी में गुजारा है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए भी पैसे नहीं हुआ करते थे। रामानंद सागर के परिवार वालों के पास पैसों की कमी हो गई। आर्थिक तंगी की वजह से रामानंद सागर की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ा। शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्हें बहुत से परेशानियों का सामना करना पड़ा था जिसके बाद उन्होंने काम करने का फैसला लिया। रात में पढ़ाई की और दिन को काम करने लगे। रामानंद सागर में एक चपरासी के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। इस नौकरी से उनके पास कुछ पैसे आने लगे थे इसके बाद रामानंद सागर ने ट्रक क्लीनर से लेकर साबुन बेचने और सुनार का काम भी किया था।

रामानंद सागर जी को लेखन में बहुत रूचि थी। भले ही रामानंद सागर जी ने अपने जीवन में बहुत सी परेशानियां झेली परंतु इन्होंने कभी हार नहीं मानी थी। लगातार यह अपने संघर्षपूर्ण जीवन को पार करते हुए आगे बढ़ते चले गए। रामानंद सागर जी की जिंदगी में अचानक एक ऐसा मोड़ आया, जिससे उनका पूरा जीवन ही बदल गया। आपको बता दें कि उन्होंने मुंबई मायानगरी का रुख किया था।

रामानंद सागर जी ने “रेडर्स ऑफ द रेल रोड” नाम की मूक फिल्म से एक क्लैपर बॉय के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर में असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर भी काम किया। राज कपूर की फिल्म बरसात की कहानी और स्क्रीनप्ले भी उन्होंने लिखा। धीरे-धीरे यह कामयाबी की तरफ आगे बढ़ रहे थे और कई हिट फिल्में दीं। फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि टीवी इंडस्ट्री तक इनका नाम गूंजने लगा।

रामानंद सागर की रामायण को करीब 33 साल हो गए लेकिन आज भी लोग रामायण देखना बेहद पसंद करते हैं। रामानंद सागर की रामायण में अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया ने राम और सीता का रोल प्ले किया है। सभी लोग इनको सच में राम-सीता समझने लगे थे। आज भी रामायण अगर टीवी पर आता है तो लोग अपने परिवार के साथ रामायण देखने के लिए बैठ जाते हैं।

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