धार्मिक

रामायण के अनुसार इन 4 लोगों पर ना करें विश्वास अन्यथा जीवन में खड़ा हो जाएगा मुसीबतों का पहाड़

धर्म ग्रंथों का हमारे जीवन में विशेष महत्व होता है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसी बहुत सी बातें बताई गई हैं जिनकी सहायता से हम अपने जीवन का महत्व समझ सकते हैं। इतना ही नहीं बल्कि धार्मिक ग्रंथों में ऐसे कई पाठ हैं जिनको अगर अपने जीवन में उतार लिया जाए तो जीवन की बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं। रामायण भी धार्मिक ग्रंथों में सबसे महत्वपूर्ण है। रामायण में ऐसी बहुत सी बातों का जिक्र किया गया है जो बहुत महत्व रखती हैं। रामायण की हर चौपाई में महत्वपूर्ण ज्ञान छुपा हुआ है।

रामायण में बहुत सी चौपाइयां हैं उन्हीं चौपाइयों में से हम एक चौपाई के बारे में आपको बताने वाले हैं। दरअसल, रामायण की एक चौपाई में इस बात का ज्ञान मिलता है कि मनुष्य को अपने जीवन में 4 तरह के लोगों से सावधान रहना चाहिए क्योंकि इस तरह के लोग जीवन में मुसीबतें खड़ी कर देते हैं। तो चलिए जानते हैं वह चार लोग कौन से हैं-

रामायण की चौपाई- “सेवक सठ नृप कृपन कुनारी। कपटी मित्र सूल सम चारी”

1. ऐसे लोगों से जितना हो, दूर ही रहें- रामायण की इस चौपाई से इस बात को समझाने की कोशिश की गई है कि “सेवक सठ” यानी कि मूर्ख सेवक से हमेशा दूर रहना चाहिए। जो सेवक मूर्ख है वह आपको हानि पहुंचा सकता है। यहां इसका मतलब यह है कि मूर्ख सेवक को किसी भी बात जानकारी नहीं होती है कि उसको कब क्या और कैसे बात करनी है? मूर्ख सेवक आपकी बातों को कहीं भी और किसी के भी सामने कह सकता है, जिसकी वजह से हो सकता है कि आपको भारी नुकसान झेलना पड़े। इसलिए इस प्रकार के लोगों से दूरी बनाए रखने में ही फायदा होता है।

2. ऐसे लोग जरूरत पर देते हैं धोखा- रामायण में नृप कृपन यानी कि कंजूस राजा से हमेशा दूरी बनाकर रखने की सलाह बताई गई है। यहां इसका मतलब है कि कंजूस व्यक्ति हर समय अपनी कंजूसी दिखाता है। चाहे उसके जीवन में कितनी भी बड़ी परेशानी क्यों ना आ जाए, वह हमेशा धन बचाने की ही कोशिश में लगा रहता है। कंजूस व्यक्ति को इस बात से कुछ भी लेना देना नहीं होता कि धन बचाने के चक्कर में उसको कितनी बड़ी हानि हो सकती है। बस वह सिर्फ धन खर्च ना हो, इसी की कोशिश में लगा रहता है। इस तरह के राजा से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए अन्यथा जरूरत पड़ने पर यह आपको धोखा ही देते हैं।

3. ऐसी स्त्री परेशानी में सबसे पहले छोड़ देती है साथ- रामायण में कुनारी यानी कि कुलटा स्त्री से हमेशा व्यक्ति को दूरी बना कर चलना चाहिए। यहां पर ऐसी नारी के बारे में बताया गया है जो अपने कुल की मर्यादा और सम्मान का ख्याल नहीं रखती है। इस तरह की महिलाएं सिर्फ अपने बारे में ही सोचती रहती हैं। उनको सिर्फ अपनी सुख-सुविधाओं का ही ध्यान लगा रहता है। रामायण की इस चौपाई में ऐसा बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति इस प्रकार की स्त्री के साथ संबंध रखता है तो वह केवल अपने सुख-सुविधाओं के लिए ही आपका साथ देगी परंतु अगर आपके ऊपर किसी प्रकार की कोई परेशानी आती है तो वो स्त्री सबसे पहले आपका साथ छोड़ देगी, इसलिए ऐसी स्त्रियों से दूर रहना चाहिए।

4. ये सुख में साथ रहते हैं, मुसीबत में साथ छोड़ देते हैं- रामायण के अनुसार कपटी मित्र से दूर रहना चाहिए क्योंकि इस तरह के मित्र सुख में आपके साथ रहेंगे परंतु अगर आपके ऊपर परेशानी आती है तो यह साथ छोड़ कर चले जाते हैं। ऐसे दोस्तों से आप जितना दूर रहें उतना ही अच्छा है। अगर कोई दोस्त सुख-दु:ख में आपका साथ देता है और उसका एक समान ही व्यवहार रहता है तो वही आपका सच्चा मित्र होता है।

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