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जरूरतमंदों के लिए मसीहा बना ये युवा, अपनी बाइक को एंबुलेंस बनाकर दे रहा है फ्री सर्विस

इस दुनिया में अभी भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो रोजाना किसी ना किसी की सहायता करते रहते हैं। इन लोगों के बारे में जानकर यह मालूम होता है कि दुनिया में इंसानियत अभी भी जिंदा है। इन लोगों को किसी भी चीज का स्वार्थ नहीं है, बस इनको दूसरों की सहायता करने में सुकून मिलता है। आज हम आपको एक ऐसे युवक के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जो दिन-रात का फर्क भुलाकर बनारस की गलियों में लोगों की सहायता के लिए घूमता रहता है। उनके इस काम की सभी लोग सराहना करते हैं।

हम आपको जिस युवा के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं उसका नाम अमन यादव है, जो बनारस के रहने वाले हैं। वर्तमान समय में पूरा बनारस अमन को अच्छी तरह से जानता है और उनके द्वारा किए गए नेक कार्य की सभी लोग खूब प्रशंसा करते हैं। अमन बनारस की किसी ना किसी गली में लोगों की मदद करते रहते हैं। आपको बता दें कि बनारस की कहीं भी किसी भी गली में जहां पर एंबुलेंस पहुंचने की सुविधा नहीं है, वहां पर अमन पहुंचकर लोगों की मदद करते हैं।

कोरोना महामारी के बीच की लोगों की मदद

करोना काल में जब सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दूसरों को छूने से भी डरते थे, तब उस समय के दौरान जिन लोगों को ब्लड की आवश्यकता थी उनके लिए अमन ने ब्लड का इंतजाम कराया। अमन ने बीमार लोगों, बुजुर्गों जरूरतमंद लोगों की मदद की। बेसहारों के लिए यह मसीहा बनकर सामने आए और उनका इलाज करवाया। इतना ही नहीं बल्कि खाने-पीने की चीजें भी उपलब्ध कराईं।

इस नेक काम के पीछे यह है कहानी

खबरों के अनुसार ऐसा बताया जाता है कि बातचीत के दौरान अमन ने यह बताया था कि जब वह सातवीं कक्षा में पढ़ते थे तो बनारसी के कचहरी में ब्लास्ट हुआ था। उस समय के दौरान कबीरचौरा अस्पताल से वह गुजर रहे थे तो उन्होंने देखा कि मोर्चरी के पास लाशें पड़ी हुई हैं। वहां पर मरीजों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं थी। कोई भी उन लाशों के पास से नहीं जा रहा था। बस क्या था, इसी के बाद उनके जीवन पर इसका काफी बड़ा प्रभाव पड़ा और यह अक्सर कबीरचौरा अस्पताल जाने लगे।

इसी बीच अमन के पिताजी ने कई बार उनकी पिटाई भी की थी। उनके पिताजी स्कूल जाने के लिए कहा करते थे परंतु अमन का पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं था। तब कबीरचौरा अस्पताल के सामने एक दवाई की दुकान पर उनके पिताजी ने काम पर अमन को लगा दिया। छोटी उम्र से ही उनको गरीबों और मरीजों की परेशानी का एहसास हुआ। दुकान से निकलने के बाद अमन अस्पताल पहुंच जाया करते थे और बीमार असहाय लोगों की सहायता करते थे।

लोगों की सेवा करने से अमन को काफी खुशी मिलती थी। इसी बीच वह गंगा के लिए आंदोलनरत सन्यासियों के संपर्क में आ गए थे। अमन के नेक कामों को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उन्हें साइकिल दी। साइकिल मिलने की वजह से बेहद कम समय में अमन अस्पताल पहुंच जाया करते थे और लोगों की सेवा भी यह और अधिक करने लगे। लेकिन इसी बीच चोरों ने उनकी साइकिल चुरा ली।

बाइक को बना दिया एंबुलेंस

साइकिल चोरी होने के बाद अमन काफी परेशान हो गए क्योंकि उनके इस नेक काम की गति धीमी पड़ गई। उनकी परेशानी को देखकर एक शख्स ने उनको अपनी बाइक दी और अमन ने बाइक को ही एंबुलेंस में बदल दिया और उनके नेक काम का सिलसिला लगातार जारी रहा। वाराणसी के आसपास के इलाकों में अगर कोई भी उनको फोन करता है तो वह तुरंत ही अपनी बाइक लेकर वहां पहुंच जाते हैं। अमन हमेशा अपने साथ फर्स्ट एड किट रखते हैं। जरूरत के हिसाब से वह इलाज करने के बाद अस्पताल भी मरीज को पहुंचा देते हैं।

वाराणसी में एक रुपए की एक मुहिम चला रहे हैं अमन


आपको बता दें कि अमन सोनू सूद को मदद करते हुए देख काफी प्रेरित हुए थे, जिससे उनका उत्साह और अधिक बढ़ गया। अमन यही चाहते थे कि जिस प्रकार सोनू सूद मुंबई के लोगों की सहायता में जुटे हुए हैं, ठीक उसी प्रकार वह भी बनारस के लोगों की मदद करें। अब अमन ने वाराणसी में ₹1 का एक मुहिम भी शुरू किया है। अमन का ऐसा कहना है कि एक रुपए से वह लोगों का इलाज कराते हैं और उनकी सहायता करते हैं।

अमन के नेक कामों को देखते हुए बनारस के लोगों ने भी उनका पूरा साथ दिया और उनके एक रुपए मुहिम में लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। अमन भी अपनी तरफ से पूरा सहयोग करते हैं। हाल ही में एक लड़की जिसके दोनों पैर कट गए हैं उसके लिए आर्टिफिशियल पैर की व्यवस्था कर रहे हैं। वह इन्हीं पैसों से लोगों का इलाज कराते हैं। अमन के इस मुहिम में अगर साथ देना चाहते हैं तो 8587553080 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

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