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महाभारत के अनुसार मनुष्य के स्वभाव से जुड़े हुए ये दोष दुख का हैं कारण, जीवनभर नहीं मिलती खुशी

संसार में हर मनुष्य के जीवन में सुख-दुख का आना जाना लगा रहता है। हर इंसान यही चाहता है कि उसके जीवन में कभी भी दु:ख ना आए परंतु इसके बावजूद भी कई लोगों को देखा गया है कि वह हमेशा दुखी ही रहते हैं। बहुत से लोगों का स्वभाव ऐसा होता है कि वह हमेशा दुखी ही नजर आते हैं। इस तरह के लोग जब भी किसी से बात करते हैं तो अक्सर उनके दुख का कारण पूछने पर अपनी किस्मत को कोसने लगते हैं या फिर भगवान को बुरा भला कहने लगते हैं।

इन लोगों का स्वभाव ऐसा ही होता है। अगर कोई इनसे हंसी खुशी भी बात करता है तो वह उसमें भी कहीं ना कहीं दुख ढूंढ निकाल लेते हैं। महाभारत में ऐसे लोगों के दुख का कारण क्या है? इसके बारे में उल्लेख किया गया है। आपको बता दें कि महाभारत के पांचवे वेद में जीवन जीने की कला का वर्णन किया गया है, जिनको अगर मनुष्य अपनाता है तो वह अपना सुखी पूर्वक जीवन व्यतीत कर सकता है।

महाभारत में मनुष्य के स्वभाव से जुड़े हुए ऐसे दोष के बारे में वर्णन किया गया है जिसकी वजह से मनुष्य हमेशा अपने जीवन में दुखी ही रहता है। आज हम आपको महाभारत के अनुसार मनुष्य अपने स्वभाव के किन दोष से पीड़ित होने की वजह से हमेशा दुखी रहता है, इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

दूसरों से ईर्ष्या करने वाले लोग हमेशा रहते हैं दुखी

महाभारत में इस बात का वर्णन किया गया है कि अगर कोई मनुष्य हमेशा दूसरों को देखकर ईर्ष्या की भावना रखता है। जो लोग दूसरों के सुख और तरक्की को देख कर जलते हैं, ऐसे लोगों को अपने जीवन में कभी भी खुशी नहीं मिलती है। यह हमेशा दुखी ही रहते हैं।

दुख का कारण बनता है क्रोध

महाभारत के अनुसार जो लोग हमेशा क्रोध करते हैं। उनको अपने जीवन में कभी भी खुशी नहीं मिलती है। इस तरह के लोग अपने जीवन में हमेशा दुखी ही रहते हैं। इस तरह के लोगों को किसी की भावनाओं की कदर नहीं होती है, जिसके कारण एक दिन उसके जितने भी करीबी लोग होते हैं उससे बहुत दूर चले जाते हैं। जिन लोगों का क्रोधी स्वभाव होता है वह गुस्से में आकर कुछ ना कुछ गलत कर देते हैं, जिसकी वजह से उनको जीवन भर पछताना पड़ता है।

असंतोष की भावना बनता है दुख का कारण

दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास सब कुछ है। जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं है परंतु उसके बावजूद भी उनके अंदर असंतोष की भावना देखने को मिलती है। महाभारत के अनुसार ऐसे इंसान अपने जीवन में हमेशा दुखी ही रहते हैं।

शक बनता है दुख का कारण

जो मनुष्य हमेशा शक करता है। वह अपने जीवन में हमेशा दुख भोगता है। शक्की मनुष्य अपने आपको हमेशा सही समझता है और दूसरों को गलत मानता है, जिसकी वजह से वह जीवनभर दुखी रहता है।

दूसरों की बुराई करने वाला इंसान हमेशा रहता है दुखी

महाभारत में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जो मनुष्य हमेशा दूसरों की बुराई करता है। उसको अपने जीवन में कभी भी सुख नहीं मिलता है। ऐसे लोग अपना जीवन दुख के साथ व्यतीत करते हैं। ऐसे लोगों की समाज में हमेशा आलोचना ही होती है।

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