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हादसे में खो दिए दोनों पैर नहीं खोई हिम्मत, अब 35 किलोमीटर का सफर कर ड्यूटी करता है ये जवान

आपको बता दें कि प्रत्येक राज्य में कई पुलिस लाइनें होती हैं। जहां पर पुलिस के जवान तैनात रहते हैं। पुलिस चौकियों पर भी वह अपने कार्य काल के दौरान तैनात रहते हैं। वैसे देखा जाए तो पुलिस का काम बहुत ही कठिन होता है। पुलिस को बहुत सी चीजों का सतर्कता से ध्यान रखना पड़ता है। पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए दिन-रात अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहती है ताकि देश के लोग सुरक्षित और बिना किसी चिंता के घर में आराम से रह पाएं। पुलिस कर्मचारियों के ऊपर चौबीस घंटे खतरा मंडराता रहता है।

पुलिसकर्मियों को कब चोर डकैतों से मुठभेड़ करना पड़े और कब घायल हो जाएँ इसके बारे में बता पाना बहुत ही मुश्किल है। पुलिस वाले अपनी जान को जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभाते हैं। उनको खुद भी यह नहीं पता होता कि वह आज शाम को घर वापस लौट पाएंगे या नहीं परंतु इसके बावजूद भी पुलिस वाले अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते हैं।

आज हम आपको एक ऐसे जवान के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिसने एक हादसे में अपने दोनों पैर खो दिए लेकिन उस जवान ने अपनी हिम्मत नहीं हारी और 6 महीने बिस्तर पर रहने के बाद अब 35 किलोमीटर का सफर कर ड्यूटी करता हैं।

हम आपको जिस जवान के बारे में जानकारी दे रहे हैं उनका नाम अभिषेक निर्मलकर है जो ड्यूटी के लिए रोजाना भिलाई से रायपुर जाते थे। आपको बता दें कि अभिषेक निर्मलकर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड ATS में थे। जब अभिषेक एक रात दानापुर एक्सप्रेस से घर के लिए निकले तो उनके साथ एक हादसा हो गया। आपको बता दें कि अभिषेक निर्मलकर ट्रेन के गेट पर खड़े थे। अचानक से ही बोगी में धक्का-मुक्की हुई और वह नीचे गिर पड़े।

अभिषेक निर्मलकर जब नीचे गिरे तो वह बेहोश हो गए और जब उनकी आंखें खुलीं तो उन्होंने खुद को अस्पताल के अंदर पाया। इस हादसे की वजह से उनका एक पैर नहीं था और दूसरा पैर उठ भी नहीं पा रहा था। अभिषेक निर्मलकर को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने उनको बताया कि उनका एक पैर कट गया है और दूसरे पैर को भी अलग करना पड़ेगा। ऑपरेशन के बाद उनका दूसरा पैर भी कट गया था।

खबरों के अनुसार ऐसा बताया जा रहा है कि अभिषेक निर्मलकर ने जब अपने दोनों पैर खो दिए तो वह पूरी तरह से टूट गए थे। वह इतने चिंतित हो गए कि वह डिप्रेशन में भी जाने लगे थे लेकिन इस मुश्किल भरे समय में उनकी पत्नी और घरवालों ने उनका मजबूती के साथ सहयोग किया। आपको बता दें कि उनकी डेढ़ साल की बेटी और 7 साल का बेटा है। उनकी पत्नी और बुजुर्ग पिता उनके साथ हमेशा खड़े रहे।

अभिषेक निर्मलकर के साथ हुए इस हादसे के बाद परिवार वालों के साथ साथ एटीएस के अधिकारियों ने भी उनको सहारा दिया था। खबरों के अनुसार ऐसा बताया जा रहा है कि उन्होंने कृत्रिम पैरों पर खड़े होने का संघर्ष किया। लगभग 6 महीने तक वह बिस्तर पर पड़े रहे परंतु उसके बाद यह सफल हुए। धीरे-धीरे इन्होंने चलने की कोशिश की। कई बार गिरे, कई बार खड़े हुए लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दोस्तों ने भी इनका पूरा साथ दिया। बाइक पर उनको बैठा कर बाहर ले जाते थे।

रिपोर्ट के अनुसार 20 अक्टूबर को अभिषेक निर्मलकर ने अपनी ड्यूटी जॉइन कर ली। रोजाना 35 किलोमीटर दूर दोस्त की बाइक पर सवार होकर वह ड्यूटी के लिए जाते हैं।

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