धार्मिक

हरिद्वार में है माता का ये चमत्कारिक मंदिर, जहां दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण

भारत देश धार्मिक देशों में से एक माना जाता है। हमारे देश में ऐसे बहुत से मंदिर हैं, जो अपने चमत्कार और विशेषताओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। सभी भक्तों की इन मंदिरों से अटूट आस्था जुड़ी हुई है जिसके चलते मंदिरों में भारी संख्या में भक्त भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं। वैसे देखा जाए तो देश के ऐसे कई स्थान हैं जो प्रमुख तीर्थ स्थल में से एक माने जाते हैं। उन्हीं में से उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थों में से एक माने जाने वाले हरिद्वार में साल भर भक्तों का मेला लगा रहता है।

हरिद्वार में इन दिनों कुंभ मेले की वजह से भक्तों की कुछ ज्यादा ही भीड़ देखने को मिल रही है। हरिद्वार के अलावा यहां ऐसे कई प्रमुख धार्मिक स्थल और मंदिर है जिनकी मान्यता बहुत ही प्राचीन काल से चली आ रही है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से मनसा देवी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

मनसा देवी का यह चमत्कारिक मंदिर दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध है। मनसा देवी का यह मंदिर हरिद्वार से करीब 3 किलोमीटर दूर शिवलिंग पर्वत श्रंखला में बिलवा पहाड़ पर स्थित है। इस मंदिर में भक्तों की साल भर भारी भीड़ लगी रहती है परंतु नवरात्रि के महीने में यहां पर भक्तों की कुछ ज्यादा ही भीड़ देखने को मिलती है। माता के इस मंदिर के बारे में ऐसा बताया जाता है कि जो भक्त यहां पर मुराद लेकर आता है उसकी सभी मनोकामनाएं देवी मां की कृपा से पूरी हो जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देखा जाए तो देवी मनसा जी को भगवान शंकर जी की पुत्री के रूप में मान्यता प्राप्त है। ऐसा बताया जाता है कि मनसा का विवाह जगत्कारू से हुआ था और उनके पुत्र का नाम आस्तिक था। आपको बता दें कि मनसा देवी को नागों के राजा वासुकी के बहन के रूप में भी जाना जाता है। माता के इस मंदिर में मां की दो मूर्तियां स्थापित हैं। इनमें से एक मूर्ति की पंच भुजाएं और एक मुख है और वहीं दूसरी मूर्ति की आठ भुजाएं हैं।

मनसा देवी मंदिर को मां दुर्गा के 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। माता ममता की मूर्ति मानी जाती हैं। यहां पर मां मनसा देवी अपने भक्तों को कभी भी निराश नहीं जाने देती हैं। जो भक्त अपनी मुराद लेकर यहां पर आता है उनकी सभी मनोकामनाएं मां देवी पूरी करती हैं। यहां पर आने वाले भक्त अपनी मुराद लेकर एक पेड़ पर धागा बांधते हैं। जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो उसके बाद धागे को खोलते हैं। उसके बाद माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त कर वापस चले जाते हैं।

पुराणों में मनसा देवी का वर्णन अलग-अलग प्रकार से किया गया है। पुराणों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि मां मनसा देवी का जन्म कश्यप ऋषि के मस्तिष्क से हुआ था और मनसा किसी भी विष से अधिक शक्तिशाली थीं इसलिए ब्रह्म ने इनका नाम विषहरि रखा था। वहीँ विष्णु पुराण के चतुर्थ भाग में एक नाग कन्या का वर्णन किया गया है जो आगे चलकर मनसा के नाम से प्रचलित हुई। वहीं अगर ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार देखा जाए तो यह एक नाग कन्या थी जो शिव तथा कृष्ण जी की भक्त थीं।

देवी मां के इस मंदिर में दर्शन करने के लिए कुल 786 सीढ़ियां चढ़ने पड़ती है।आप रोप वे की सवारी लेकर यहां पर दर्शन करने के लिए आ सकते हैं। माता का यह मंदिर प्रातः काल 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहता है। दोपहर 12:00 से 2:00 के बीच यह मंदिर बंद कर दिया जाता है ऐसा माना जाता है कि इस समय के दौरान मनसा देवी का श्रृंगार किया जाता है। मनसा देवी मंदिर बहुत चमत्कारिक है जिसके चलते भक्त यहां पर दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं और भक्तों की सभी परेशानियां माता रानी दूर करती हैं।

Related Articles

Back to top button