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बेहद चमत्कारी है शनि छल्ला लेकिन पहनने से पहले जान लें ये बात अन्यथा होगा बड़ा नुकसान

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को न्याय प्रिय ग्रह बताया गया है। शनि देव हमेशा मनुष्य के कर्मों के अनुसार ही फल प्रदान करते हैं। जो व्यक्ति अपने जीवन में हमेशा बुरे कार्य की तरफ रहते हैं। गलत तरीके से अपना जीवन व्यतीत करते हैं उनको शनिदेव के दंड का सामना करना पड़ता है। लेकिन जो लोग अच्छे कार्य करते हैं उनके ऊपर शनि देव हमेशा मेहरबान रहते हैं। उन लोगों को शनिदेव कभी भी परेशान नहीं करते हैं।

ज्योतिष के अनुसार देखा जाए तो लोहे की अंगूठी और घोड़े के नाल की अंगूठी धारण किया जाए तो इससे शनि के बुरे प्रभावों से बचा जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति के ऊपर शनि की महादशा, शनि की ढैया, साढ़ेसाती जैसी परेशानियां चल रही हैं तो इससे बचने के लिए आप लोहे का छल्ला धारण करें। परंतु इससे पहनने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है। अन्यथा आपके जीवन में बहुत सी परेशानियां उत्पन्न होने लगेंगी। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से लोहे का छल्ला धारण करने के क्या नियम हैं इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

शनि छल्ला पहनने से पहले जान लीजिए ये नियम

1. अगर आप लोहे का छल्ला धारण कर रहे हैं तो सबसे पहले आप अपनी कुंडली की जांच जरूर करा लीजिए। अगर आप बिना कुंडली की जांच कराए हुए छल्ला पहनते हैं तो अन्य ग्रहों की स्थिति की वजह से आपके ऊपर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

2. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि ग्रह शुभ फल प्रदान कर रहा है तो उन लोगों को लोहे का छल्ला पहनने से बचना चाहिए अन्यथा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

3. अगर आप शनि का छल्ला धारण कर रहे हैं तो आपको इस बात का पता होना चाहिए कि छल्ला किस उंगली में धारण करना चाहिए। बहुत से लोग ऐसे हैं जो शनि का छल्ला किसी भी उंगली में धारण कर लेते हैं परंतु यह ठीक नहीं माना गया है। लोहे का छल्ला हमेशा दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में ही पहनें, तभी आपको इसका शुभ प्रभाव मिल पाएगा। बता दें मध्यमा उंगली के नीचे शनि पर्वत स्थित होता है, जिसकी वजह से इस उंगली में शनि छल्ला पहनने से उचित फल की प्राप्ति होती है।

4. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति शनि का छल्ला धारण कर रहा है तो सबसे पहले दिन और नक्षत्र का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है। शनि छल्ला धारण करने के लिए शनिवार की शाम का समय बहुत ही उत्तम माना गया है। इसके अलावा उससे अनुराधा, उत्तरा, भाद्रपद एवं रोहिणी नक्षत्र में शनि का छल्ला धारण करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

5. अगर आपने शनि का छल्ला पहन रखा है या फिर पहनने के बारे में विचार कर रहे हैं तो आपको सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप छल्ले को मैला ना होने दें। समय-समय पर लोहे का छल्ला साफ करके चमकाते रहिए।

6. अगर आपने लोहे का छल्ला धारण कर लिया है तो आप उसको बार-बार निकाले नहीं, हमेशा इसको धारण करके ही रखिए। क्योंकि अगर आप बार-बार शनि का छल्ला उंगली से बाहर निकालते हैं तो इसका लाभ नहीं मिल पाता है।

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