धार्मिक

नींव की खुदाई और पूजन के समय इन बातों का ध्यान रखना है जरूरी, जानिए नियम

सनातन धर्म ऐसे कई प्रकार के ग्रंथ और शास्त्र हैं, जिनमें मनुष्य के जीवन से जुड़ी हुई बहुत सी बातें बताई गई हैं। ये शास्त्र और ग्रंथ मनुष्य को जीवन जीने की राह दिखाते हैं। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं हर मनुष्य के जीवन में किसी ना किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न होती रहती है। ऐसे में शास्त्रों में बहुत से तरीके बताए गए हैं जिनकी मदद से हम अपने जीवन की कठिनाइयों से बाहर निकल सकते हैं। शास्त्रों में से एक वास्तु शास्त्र है। इस शास्त्र के ज्ञान का प्रयोग प्राचीनतम काल से ही चला आ रहा है।

वास्तु शास्त्र में मनुष्य के जीवन पर आधारित बहुत सी बातों का उल्लेख किया गया है। हमारे आसपास का वातावरण या फिर कार्यालय का वातावरण, हर जगह पर वास्तु नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है इसके अलावा वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन निर्माण में भी कुछ नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। अगर हम अपने भवन को वास्तु के नियमों को ध्यान में रखते हुए बनाते हैं तो इससे जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है परंतु अगर हम वास्तु शास्त्र में बताए गए नियमों का पालन नहीं करेंगे तो इसके कारण जीवन में बहुत सी परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं।

जब भवन का निर्माण किया जाता है तो उस समय के दौरान सबसे पहले नींव की खुदाई का कार्य होता है। नींव पर ही पूरा घर टिका होता है। इसी वजह से नींव की खुदाई करने से लेकर उसे भरवाने और पूजा करवाने से संबंधित सभी बातों का ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से वास्तु शास्त्र के अनुसार नींव भरवाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

घर के नींव भरवाने के लिए शुभ महीना और समय

  • अगर आप घर का कार्य आरंभ करवाना चाहते हैं तो इससे पहले शुभ महीना का पता होना बहुत ही जरूरी है। हिंदू चंद्रमास के अनुसार वैशाख, श्रावण, कार्तिक, मार्गशीर्ष और फाल्गुन आदि महीना घर के कार्य आरंभ करने के लिए शुभ माना जाता है। आप अन्य महीनों में घर बनवाने की शुरुआत करने से बचें।
  • अगर आप नींव पूजन और घर बनवा रहे हैं तो उस समय के दौरान आपको ध्रुव तारे का ध्यान रखना जरूरी है। अब इस बात का ध्यान रखें कि संध्याकाल और मध्य रात्रि के समय घर की नींव ना रखें।
  • आप इस बात का ध्यान रखें कि नींव रखने में ईंट, पत्थर और लकड़ी आदि का जो सामान लगना है, वह नया होना चाहिए।

नींव खुदाई का आरंभ इस दिशा में करें

  • नींव खुदाई का आरंभ किस दिशा से करना चाहिए? इसके बारे में पता होना भी बेहद जरूरी है। आप सबसे पहले ईशान कोण से घर की नींव की खुदाई का आरंभ करवाएं।
  • उसके पश्चात आग्नेय कोण से खुदाई शुरू कराएं।
  • इसके बाद वायव्य कोण से खुदाई शुरू करानी होगी।
  • बाद में नैऋत्य कोण से खुदाई आरंभ कराएं।
  • इस प्रकार से खुदाई करवाने के पश्चात पूर्व, उत्तर, पश्चिम और दक्षिण दिशा के क्रमवार तरीके से खुदाई करवाएं।

नींव की भराई इस दिशा से करें

  • नींव भराई सबसे पहले नेऋत्य कोण से शुरू कराएं।
  • इसके बाद क्रमानुसार वायव्य, आग्नेय, ईशान कोण से नींव की भराई कराएं।
  • सबसे पहले दिशाओं में दक्षिण, पश्चिम, उत्तर और पूर्व में क्रम पूर्वक नींव भराई का कार्य आरंभ करवाइए।

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की नींव रखने से पहले जानें नियम

  1. अगर आप अपने घर की नींव रख रहे हैं तो सबसे पहले समय और पूजन के लिए रवि पुष्य योग या फिर उचित शुभ मुहूर्त और दिन को ध्यान में रखें।
  2. नींव रखने से पहले आप इस बात का ध्यान रखें कि एक चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अवश्य रखिए। ऐसा माना जाता है कि पाताल लोक इस पृथ्वी के नीचे है, जिसके स्वामी नाग देवता हैं। इसलिए नींव की पूजा में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा रखना जरूरी है।
  3. अगर आप नींव पूजन करवा रहे हैं तो उस समय के दौरान दूध, दही और घी का इस्तेमाल जरूर करें।
  4. कई बार देखा जाता है कि भूमि की खुदाई कराने के दौरान कोयला, हड्डी, भूसा, राख आदि जैसी चीजें निकलने लगती हैं। ऐसी स्थिति में अगर ऐसी जगह पर घर बनवाया जाए तो घर में रहने वाले लोगों को कई प्रकार की बीमारियां और कष्ट का सामना करना पड़ता है। वास्तु शास्त्र में ऐसी जमीन पर घर बनवाने से बचना चाहिए परंतु यह संभव नहीं है तो आप किसी योग्य ज्योतिष, पुरोहित आदि से अनुष्ठान और उपाय करवाने के पश्चात नींव भरें।
  5. अगर घर का कोई सदस्य बीमार है तो ऐसी स्थिति में न्यूनींव की खुदाई शुरू ना करें।
  6. अगर घर में कोई महिला गर्भवती है या गर्भावस्था का आखिरी चरण चल रहा है तो ऐसे में नींव की खुदाई कुछ समय के लिए टाल दें।

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