धार्मिक

7 मई को है वरुथिनी एकादशी, इस दिन न खाएं चावल और इन कामों को करने की न करें गलती

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार एकादशी का बहुत महत्व माना गया है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु जी को समर्पित है। इस दिन विष्णु जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। आपको बता दें कि हर महीने 2 बार एकादशी पड़ती है, एक बार कृष्ण पक्ष में और एक बार शुक्ल पक्ष में। इन दोनों ही बार एकादशी का व्रत किया जाता है और हर एकादशी का अपना अलग-अलग महत्व माना गया है।

आपको बता दें कि इस महीने की पहली एकादशी का व्रत 7 मई शुक्रवार को है। यह महीना वैशाख का है और इस महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जानते हैं। हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष स्थान और इसे सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर एकादशी का व्रत किया जाए तो मनुष्य के सारे पापों का नाश हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

एकादशी के दिन चावल ना खाएं

शास्त्रों में एकादशी व्रत से जुड़े हुए नियमों के बारे में जानकारी बताई गई है जिनका पालन बहुत ही जरूरी है। अगर इन नियमों का पालन नहीं किया जाए तो इससे मनुष्य को व्रत का फल नहीं मिल पाता है। इन्हीं नियमों में से एक एकादशी के दिन चावल नहीं खाने का नियम है। ऐसा माना जाता है कि अगर एकादशी के दिन मनुष्य चावल खाता है तो इससे अगले जन्म में वह रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है। इसी वजह से एकादशी के दिन भूलकर भी चावल नहीं खाना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि चावल का सेवन करने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है, जिससे मन चंचल हो जाता है और व्रत के नियमों का पालन करने में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं। इसी वजह से एकादशी के दिन चावल का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

एकादशी के दिन चावल ना खाने से जुड़ी हुई एक पौराणिक कथा भी है, जिसके अनुसार, माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने अपने शरीर का त्याग कर दिया था, जिससे उनके शरीर का अंश धरती माता के अंदर समा गया था। ऐसा माना जाता है कि जिस दिन महर्षि का शरीर धरती में समाया था उस दिन एकादशी का दिन था। ऐसा बताया जाता है कि महर्षि मेधा ने चावल और जौ के रूप में धरती से जन्म लिया था। यही कारण है कि चावल और जौ को जीव माना जाता है और एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता है।

एकादशी के दिन इन कामों को करने की न करें भूल

  • एकादशी तिथि के दिन आप चावल का सेवन भूल कर भी मत कीजिए इसके अलावा इस दिन लहसुन, प्याज जैसे तामसिक भोजन और मांस-मदिरा आदि का सेवन भी ना करें।
  • एकादशी के दिन आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप अपने मन को शांत रखें। आप एकादशी के दिन किसी से झूठ ना बोलें और ना ही इस दिन आप गुस्सा कीजिए।
  • एकादशी के दिन किसी भी प्रकार के लड़ाई-झगड़े से दूर रहें। इस दिन आप कटु शब्दों का प्रयोग मत कीजिए।
  • एकादशी के दिन दान करने का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। आप इस दिन केला, हल्दी या केसर का दान कर सकते हैं। इससे आपको अपने जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होगी।
  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और दिन में या शाम के वक्त ना सोएं।

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