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कोरोना काल में मसीहा बनीं स्कूल क्लर्क पूजा, बेसहारा लोगों को रोजाना बांटती हैं खाना

देशभर पर कोरोना वायरस का संकट मंडरा रहा है। इस मुसीबत में लोगों का जीवन पूरी तरह से बदल गया है। पहले जैसा कुछ भी नहीं रहा। लोग अपने घरों के अंदर बंद रहकर ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करने की कोशिश में लगे हुए हैं। कोरोना काल में लोगों की नौकरियां छूट गई हैं। ऐसे में घर का गुजारा चला पाना बहुत ही मुश्किल है। वैसे देखा जाए तो कोरोना काल में सभी लोगों को किसी ना किसी प्रकार से परेशानी का सामना करना पड़ा है परंतु जिन लोगों का कोई नहीं है और सड़कों पर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनको इस समय बहुत अधिक दिक्कत हो रही है।

ऐसे कई लोग हैं जो फुटपाथ पर रहकर किसी तरह अपनी जिंदगी काट रहे हैं लेकिन कोरोना महामारी के दौर में उनको भोजन नहीं मिल पा रहा है लेकिन ऐसा नहीं है कि इस प्रकार के लोगों की मदद के लिए कोई भी सामने नहीं आया है। ऐसे बहुत से लोग हैं, जो बेसहारा लोगों की मदद में जुटे हुए हैं। रोजाना ही कोई ना कोई ऐसी खबर सामने आ ही जाती है, जिसमें लोग अपने सामर्थ्य के हिसाब से लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। करोना काल में ऐसे लोग जरूरतमंदों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं। इन्हीं में से एक पूजा हैं।

आपको बता दें कि पूजा राजस्थान के अलवर शहर में रहती हैं। यह राजकीय माध्यमिक सालपुर उमरैण में क्लर्क हैं। यह रोजाना ही फुटपाथ पर रहने वाले लोगों को खाना खिला रही हैं। पूजा रोजाना अपने घर से खुद खाना बनाकर स्कूटर पर ले जाती हैं और फुटपाथ पर रह रहे लोगों के बीच यह खाना बांटती हैं। फुटपाथ पर रह रहे लोग भी पूजा का इंतजार करते रहते हैं। वह यही देखते रहते हैं कि वह कब आएंगी और उन्हें खाना खिलाएंगी। खबरों के अनुसार ऐसा बताया जाता है कि पूजा रोजाना ही 50 लोगों तक खाना पहुंचा कर उनका पेट भर रही हैं।

कोरोना महामारी के बीच पूजा बेसहारा लोगों के लिए मसीहा बनकर सामने आई हैं। पूजा को कई बार जिला अस्पताल में कार्य करने वाले विशाल का भी सहयोग प्राप्त हुआ है। पूजा दूसरों से भी अपील करती हैं कि वह ऐसे लोगों की मदद के लिए सामने आएं और जरूरतमंदों को खाना खिलाएं।

पूजा का ऐसा कहना है कि कुछ दिन पहले उन्हें पता चला था कि अस्पताल में जिनके मरीज भर्ती हैं, उनके रिश्तेदारों को खाना नहीं मिल पा रहा है। पूजा के मुताबिक लॉक डाउन की वजह से खाने का बाहर से भी इंतजाम नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में पूजा ने ऐसे लोगों को खाना खिलाने का कार्य शुरू किया है। सबसे पहले तो पूजा ने 10 लोगों को खाना खिलाया था और अब यह 50 लोगों को खाना खिलाती हैं।

पूजा के द्वारा किए जा रहे इस कार्य में उनके स्कूल का स्टाफ ही उनकी सहायता करता है। पूजा की आर्थिक मदद हो जाती है और वह खुद अपने घर में खाना तैयार करती हैं और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाती हैं। उनकी यही कोशिश है कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों की सहायता कर पाएं और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए वह लोगों से भी अपील कर रही हैं।

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