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जानिए क्या होते हैं शनि की साढ़ेसाती के लक्षण, इन उपायों से आपकी समस्या होगी दूर

ज्योतिष में शनि को सबसे पापी ग्रह बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि शनि क्रूर ग्रह है और ज्यादातर लोग शनि के नाम से ही भयभीत हो जाते हैं। लोगों को यही लगता है कि शनि का प्रभाव हमेशा बुरा फल ही देता है परंतु इस बात में पूरी तरह से सच्चाई बिल्कुल भी नहीं है। शनिदेव को न्याय का देवता बताया जाता है और यह हर प्राणी के साथ उचित न्याय करते हैं। जैसा मनुष्य अपने जीवन में कर्म करता है उसी के हिसाब से कर्मफल दाता शनि देव फल प्रदान करते हैं। शनि देव न्याय के देवता है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से शनि साढ़ेसाती के लक्षण और शनि की साढ़ेसाती शुरू होने पर इसके बुरे प्रभाव से कैसे बच सकते हैं? इसके बारे में बताने वाले हैं।

जानिए शनि की साढ़ेसाती के लक्षण के बारे में

  • अगर किसी व्यक्ति की हथेलियों का रंग बदलने लगे या फिर हथेली की रेखाओं में कहीं नीला तो कहीं कालेपन जैसा धब्बा दिखे तो यह शनि की साढ़ेसाती के लक्षण माने जाते हैं।
  • शनि शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव में व्यक्ति के नाखून कमजोर हो जाते हैं और वह अपने आप ही टूटने लगते हैं। इतना ही नहीं बल्कि आंखों के नीचे कालापन भी आने लगता है।
  • शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव होने पर व्यक्ति को बात-बात पर गुस्सा आता है, विचारों में उग्रता देखने को मिलती है, परिवार में कलह होने लगता है।
  • अगर माथे से चमक गायब हो जाए, ललाट पर कालापन नजर आने लगे, अपमानित होने या फिर छवि खराब होने का डर लगा रहे तो यह शनि की साढ़ेसाती के लक्षण होते हैं।

शनि की साढ़ेसाती के उपाय

  1. शनि की साढ़ेसाती के बुरे प्रभाव से बचने के लिए शनिवार के दिन लोहा, काले, उड़द की दाल, काला तिल या काला वस्त्र दान करें। इससे शनि देव आपसे प्रसन्न होंगे।
  2. शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और शनि स्त्रोत का पाठ कीजिए।
  3. आप शनिवार के दिन किसी भी शनि मंदिर में जाएं और वहां पर शनि देव को सरसों के तेल में काला तिल मिलाकर चढ़ाएं।
  4. अगर आप हनुमान जी की पूजा करते हैं तो इससे शनि का बुरा प्रभाव टल जाता है यानी शनि अशुभ फल नहीं देते हैं। शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा जरूर करनी चाहिए और हनुमान चालीसा का पाठ कीजिए।

जानिए क्या होती है शनि की साढ़ेसाती?

बहुत से लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि आखिर शनि की साढ़ेसाती किसे कहा जाता है? आपको बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की 7 साल तक चलने वाली ग्रह दशा को शनि की साढ़ेसाती के नाम से जाना जाता है। शनि ग्रह की चाल बाकी ग्रहों की तुलना में बहुत धीमी मानी जाती है। शनि ग्रह एक राशि में करीब ढाई साल तक विराजमान रहता है और दूसरी राशि में इस समय अवधि के बाद प्रवेश करता है। आपको बता दें कि शनि 3 बार किसी राशि को प्रभावित करता है। ढाई-ढाई साल का तीन चरण साढ़े सात तक साढ़ेसाती के रूप में चलता रहता है।

आपको बता दें कि शनि का एक चरण ढाई साल का होता है। अगर पहले चरण में शनि की साढ़ेसाती से व्यक्ति प्रभावित है तो इसकी वजह से मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शनि के पहले चरण में मानसिक तनाव और बेवजह का चिड़चिड़ापन अधिक रहता है और सिर दर्द की भी समस्या रहती है।

शनि की साढ़ेसाती के दूसरे चरण में व्यक्ति को आर्थिक और शारीरिक रूप से कष्ट का सामना करना पड़ता है। अचानक से ही बने बनाए काम बिगड़ने लगते हैं। फिजूलखर्ची अधिक बढ़ जाती है। किसी बीमारी या दुर्घटना की चपेट में आने की संभावना अधिक रहती है।

शनि की साढ़ेसाती के तीसरे चरण में व्यक्ति को अच्छा फल मिलता है क्योंकि इस दौरान शनि आपको हुए नुकसान की भरपाई करते हैं।

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