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कोरोना संक्रमित 2 साल के बच्चे का शव छोड़कर भागे माता-पिता, वार्ड ब्वॉय ने किया अंतिम संस्कार

कोरोना वायरस की महामारी दिन पर दिन बढ़ते ही जा रही है। सरकार द्वारा कोरोना की रोकथाम के लिए कई अहम कदम उठाए गए परंतु कोई भी फायदा देखने को नहीं मिल रहा है। कोरोना की दूसरी लहर इतनी खतरनाक साबित हुई है कि देशभर के लोग काफी परेशान हैं। रोजाना ही कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इतना ही नहीं बल्कि कोरोना ने कई लोगों की जिंदगी भी छीन ली है।

महामारी के इस दौर में ना सिर्फ शरीर पर बल्कि लोगों के मन पर भी भावनात्मक असर देखने को मिल रहा है। कोरोना का डर लोगों में इस कदर बैठ चुका है कि कहीं बेटा अपने पिता का शव लेने से भी मना कर रहा है तो कोई बेटी वायरस के डर से दूर भाग रही है। संकट की इस घड़ी में अपने ही रिश्तेदार मुंह मोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि कई लोग तो अपनों को ही पहचाने से साफ मना कर दे रहे हैं।

इसी बीच कोरोना का असर अब ममता और स्नेह के रिश्ते पर भी देखने को मिल रहा है। आपको बता दें कि झारखंड से मानवता को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है, जिसके बारे में जानकर आप भी बेहद दुखी हो जाएंगे।

दरअसल, 2 साल के मासूम बच्चे जिसका नाम बिट्टू है उसको बुखार आया था जिसके बाद उसके माता-पिता ने रिम्स में एडमिट करा दिया। जब उस बच्चे की जांच हुई तो वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया। डॉक्टरों ने उस बच्चे का इलाज करने की हर संभव कोशिश की परंतु लाख कोशिशों के बावजूद भी वह मासूम बच्चा जिंदगी की जंग हार गया परंतु अफसोस की बात यह है कि उसके मां-बाप खुद अभागे बेटे को रिम्स डॉक्टरों के पास छोड़कर भाग खड़े हुए। इस मासूम बच्चे बिट्टू की अंतिम विदाई अनाथ की तरह नहीं हुई बल्कि रिम्स के वार्ड बॉय रोहित बेदिया ने उसके अंतिम संस्कार का सारा फर्ज निभाया था।

आपको बता दें कि 11 मई को 2 साल के बिट्टू कुमार को उसके माता-पिता ने रिम्स में एडमिट कराया था। उसका इलाज कर रहे डॉक्टर अभिषेक रंजन ने यह बताया कि उसके परिवार वालों ने यह कहकर भर्ती कराया था कि बच्चे ने छुहारे की गुठली खाली है लेकिन इलाज के दौरान उनको शक हो गया था उसके माता-पिता ने यह भी कहा था कि उनके बच्चे को बुखार भी था।

जब डॉक्टरों ने उनका झूठ पकड़ लिया तो बच्चे के माता-पिता चुप हो गए, जिसके बाद उसके चेस्ट का एक्सरे किया गया, जिसमें पूरा इंफेक्शन साफ-साफ नजर आ गया। इलाज के दौरान स्थिति काफी बिगड़ गई तो बच्चे को वेंटिलेटर पर भी डाल दिया गया लेकिन बाद में अचानक ही उसके माता-पिता बच्चे को छोड़कर भाग गए।

डॉक्टरों ने उस मासूम बच्चे की जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश की परंतु 12 मई को उस बच्चे की मृत्यु हो गई थी। बच्चे की मृत्यु के पश्चात पंजीयन में दिए गए उसके माता-पिता के फोन नंबर पर संपर्क करने की बहुत कोशिश की गई परंतु कोई भी जवाब नहीं मिल पाया था। 2 दिनों के इंतजार करने के बाद रिम्स के कर्मचारियों ने बच्चे के मृत शरीर को अंतिम संस्कार के लिए घाघरा घाट भेज दिया था।

रिम्स के वार्ड बॉय रंजीत बेदिया इस बच्चे के शव के अंतिम संस्कार के लिए आगे आये। उन्होंने बच्चे के शव को अपनी गोद में लेकर एंबुलेंस से घाघरा श्मशान घाट तक ले गए। एक ऐसे व्यक्ति ने इस 2 साल के मासूम बच्चे का अंतिम संस्कार किया जिसने उसे पहले कभी देखा भी नहीं था।

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