विशेष

जब आखिरी सांसे गिन रही थी मुस्लिम पेशेंट तो हिंदू डॉक्टर ने सुनाया कलमा, जमकर हो रही तारीफ

देशभर के लिए कोरोना वायरस सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। दिन पर दिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं परंतु कोई भी फायदा देखने को नहीं मिल रहा है। अस्पतालों में बेड की कमी है और ऑक्सीजन की कमी के कारण लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

कोरोना काल में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ अपनी जान की परवाह किए बिना ही दिन-रात काम कर रहे हैं, उन्होंने एक अलग ही मिसाल कायम की है। संकट की इस घड़ी में डॉक्टर से अपना कर्तव्य बखूबी तरीके से निभा रहे हैं और दिन-रात हर संभव प्रयास करके लोगों की जान बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। ऐसी कई खबरें कोरोना काल में सुनने को मिल रही हैं, जिसको जानकर मानवता पर विश्वास बढ़ जाता है। इसी बीच केरल से एक बेहद खूबसूरत कहानी सामने आई है, जिसमें एक डॉक्टर ने अपने फर्ज से उठ कर इंसानियत का कार्य किया है।

आपको बता दें कि केरल स्थित पल्लकड़ जिले से एक खबर सामने आई है जो किसी मिसाल से कम नहीं है। जिले के पट्टांबी इलाके में स्थित सेवाना हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एक हिंदू महिला डॉक्टर ने जब एक मुस्लिम कोरोना मरीज अंतिम सांसे गिन रही थी तो कलमा पढ़कर सुनाया था। बता दें कि कोरोना से पीड़ित यह मुस्लिम महीना महिला दो हफ्ते से एसएचआरसी में वेंटिलेटर पर थी और आईसीयू में उसके रिश्तेदार को जाने की भी परमिशन नहीं थी। महिला डॉक्टर के द्वारा किए गए इस कार्य की जमकर तारीफ हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेवाना हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में कार्यरत डॉ. रेखा कृष्णा ने यह बताया कि “मरीज की हालत बिगड़ने पर 17 मई को उन्हें वेंटिलेटर से बाहर निकाला गया। रिश्तेदारों को इसकी जानकारी दी गई थी। जैसे ही मैं उनके पास पहुंची, ऐसा लगा कि उन्हें दुनिया से विदा लेने में मुश्किल हो रही है। मैंने धीरे-धीरे उनके कानों में कलमा पढ़ा, फिर मैंने उन्हें कुछ गहरी सांस लेते हुए देखा और फिर वह स्थिर हो गईं।”

डॉ. कृष्णा ने आगे यह बताया कि “मैंने ऐसा कुछ भी करने के बारे में सोचा नहीं था। यह अचानक हुआ। मैं दुबई में पैदा हुई और वही पली-बढ़ी। इसलिए मैं इस्लामिक रीति-रिवाजों और परंपराओं को जानती हूं, इसलिए ऐसा कर पाई। मेरे अलग धर्म से होने के कारण गल्फ में मेरे साथ कभी भेदभाव नहीं हुआ। बस मैंने उसी सम्मान को लौटाया है।

डॉक्टर कृष्णा ने आगे बताया कि उन्हें लगता है कि यह कोई धार्मिक कार्य नहीं था, बल्कि एक मानवीय कार्य था। कोविड-19 रोगियों के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि वह खुद को अकेला और अलग-अलग महसूस करते हैं। ऐसे में हमें मरीजों की सहायता के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए।”

आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर यह कहानी काफी तेजी से वायरल हो रही है। डॉक्टर ने यह घटना अपने एक साथी डॉक्टर को बताई थी, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की थी, जिसके बाद डॉक्टर कृष्णा की लोग जमकर प्रशंसा कर रहे हैं।

Related Articles

Back to top button