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अपनों को मरते देखा, नहीं मानी हार, चुनौतियों के बाद पहले IPS फिर IAS बनी नक्सल क्षेत्र की लड़की

इंसान का जीवन बहुत ही कठिन माना जाता है। कदम कदम पर बहुत सी बुरी से बुरी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, जो व्यक्ति उन परिस्थितियों का डटकर सामना करता है और इनको पार कर लेता है वह अपने जीवन में कामयाबी जरूर पाता है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से दंतेवाड़ा जैसे नक्सल क्षेत्र की रहने वाली नम्रता जैन के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं नक्सली और आतंकवादी क्षेत्रों में बच्चों के लिए पढ़ाई करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

नक्सली और आतंकवादी क्षेत्रों में स्कूल ज्यादातर बंधु रहते हैं परंतु अगर किसी में पढ़ने की लगन है और वह अपने जीवन में कुछ कर दिखाना चाहता है तो कोई भी कठिनाई सफल होने से नहीं रोक सकती। आपको बता दें कि नम्रता जैन के जीवन में भी एक के बाद एक कई चुनौतियां उत्पन्न हुईं परंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा था जिसके लिए वह अपनी सच्ची लगन से मेहनत करती रहीं और आखिर में उन्होंने IAS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया।

आज भले ही नम्रता जैन आईएएस अधिकारी बन गईं परंतु उनके लिए अपने सपने पूरा करना इतना आसान नहीं रहा था। उन्होंने अपने जीवन में बहुत सी चुनौतियों का सामना करना किया है। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बहुत बुरे दिन देखे परंतु फिर भी उन्होंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया और लगातार सभी चुनौतियों को पार करती चली गईं जिसका नतीजा उनको मिल चुका है। नम्रता जैन ने अपनी शुरुआती शिक्षा दंतेवाड़ा जैसे नक्सल क्षेत्र से ही पूरी की थी। यहां पर आए दिन कोई न कोई घटना होती रहती थी, जिसकी वजह से स्कूल बंद रहते थे जिसके कारण नम्रता की पढ़ाई में भी बाधा उत्पन्न होती रहती थी।

नम्रता जैन अपने जीवन में कुछ करना चाहती थीं। इसी वजह से वह हर कठिनाई को पार करती गईं। दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने एक फिर से नई समस्या खड़ी हो गई। उनको अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए दंतेवाड़ा से बाहर जाना था परंतु उनके परिवार वाले इसके लिए राजी नहीं थे. नम्रता को उनकी मां किरण का साथ मिला और माँ ने परिवार के सभी सदस्यों को समझाने की कोशिश की जिसके बाद परिवार के लोग मान गए थे।

नम्रता भिलाई में 5 साल और दिल्ली में 3 साल रही थीं। उन्होंने भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकॉम इंजीनियर की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्हें एक पब्लिक सेक्टर कंपनी में नौकरी मिल गई थी। उनका सपना था कि आईएएस ऑफिसर बने। चाचा और मामा ने भी उनका पूरा साथ दिया। नम्रता जैन अपनी नौकरी छोड़कर दिल्ली आकर परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।

जब नम्रता जैन दिल्ली आईं तो उन्होंने साल 2015 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी थी परंतु पहली बार में उनको सफलता नहीं मिल पाई। उसके बाद उनको यह मालूम हो गया था कि आईएएस बनना इतना आसान नहीं है परंतु उन्होंने अपनी मेहनत और अधिक बढ़ा दी थी। दिन-रात तैयारी में जुट गई, उसका नतीजा यह निकल कर सामने आया कि साल 2016 में उन्हें यूपीएससी परीक्षा में 99वां रैंक प्राप्त हुआ। वैसे इस रैंक के के बाद भी आईएएस अफसर बनने का उनका सपना पूरा नहीं हो पाया परंतु वह अपने सपने को नहीं भूली और लगातार यूपीएससी की तैयारी करती रहीं।

नम्रता जैन को मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अफसर नियुक्त किया गया परंतु सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकैडमी, हैदराबाद में ट्रेनिंग करने के दौरान भी उन्होंने यूपीएससी की तैयारी नहीं छोड़ी। उसके बाद नम्रता ने तैयारी के लिए 1 साल का अवकाश भी ले लिया। उन्होंने फिर यूपीएससी परीक्षा देने का सोचा परंतु इसी दौरान उनके चाचा अमृत जैन का दिल का दौरा पड़ने की वजह से निधन हो गया जिसकी वजह से नम्रता को मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। अभी इस सदमे से नम्रता उभरी ही थीं कि 6 महीने बाद उनके छोटे चाचा संतोष जैन का भी दिल का दौरा पड़ने की वजह से मृत्यु हो गई।

नम्रता जैन के ऊपर अपनों के खोने का प्रभाव बहुत ज्यादा पड़ा और वह परीक्षा के कुछ दिन पहले तक महीना भर बीमार भी रही थीं परंतु इन सबके बावजूद कभी भी नम्रता जैन ने अपनी हिम्मत नहीं हारी और उनका पूरा फोकस अपने सपने पर था। वह लगातार यूपीएससी की परीक्षा में लगी रहीं। साल 2018 में उन्होंने फिर से अपनी किस्मत आजमाई और परीक्षा दी। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने ऑल इंडिया 12वां रैंक हासिल किया। इस तरह नम्रता जैन ने अपने आईएएस अधिकारी बनने का सपना साकार कर लिया।

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