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महिला शिक्षिका की कोरोना काल में चली गयी नौकरी, अब घर चलाने के लिए चलाती है कचरा ढोने की गाडी

कोरोना महामारी की वजह से सभी लोगों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। देशभर में कोरोना वायरस एक गंभीर समस्या बन चुकी है। जब देशभर में कोरोना वायरस ने दस्तक दी थी तो उस दौरान लॉक डाउन का ऐलान किया गया था, जिसके कारण लोगों की नौकरियां छूट गई थी। इतना ही नहीं बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका असर पड़ा। कोई भी रोजगार ना होने के कारण दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना बहुत ही मुश्किल हो रहा था। लोग जैसे तैसे अपने परिवार का गुजारा चला रहे थे।

वैसे कोरोना महामारी के कारण लगे लॉक डाउन में सिर्फ दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजगार और भुखमरी का संकट पैदा नहीं किया बल्कि अच्छे अच्छे लोगों की जिंदगी को भी इस महामारी ने पूरी तरह से बदल कर रख दिया। भारत समेत दुनिया भर में लोग कोरोना वायरस में नौकरियां गवा चुके हैं। जैसे तैसे करके लोग अपने परिवार का गुजारा चला रहे हैं उन्हीं लोगों में से एक भुवनेश्वर की स्मृतिरेखा हैं जिनकी नौकरी कोरोना वायरस में चली गई।

आपको बता दें कि स्मृतिरेखा कई वर्षों से एक प्ले और नर्सरी स्कूल में बच्चों को पढ़ाया करती थीं मगर जब कोरोना वायरस की वजह से लॉक डाउन लगा तो उस दौरान स्कूल भी बंद हो गए थे, जिसकी वजह से स्मृतिरेखा की नौकरी भी छूट गई। कोई भी रोजगार ना होने के कारण उनकी हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई। उनको अपने परिवार की चिंता बहुत अधिक सताने लगी फिर स्मृतिरेखा ने घर चलाने के लिए कचरा उठाने वाली गाड़ी चलाने का फैसला किया। मजबूरी में उन्होंने सफाई गाड़ी चलाई।

बता दें स्मृतिरेखा के घर में उनके पति, दो बेटियां और परिवार के अन्य सदस्य हैं। कोरोना महामारी के बीच उनके पति को भी अपनी निजी नौकरी से कोई भी आमदनी नहीं मिल पा रही थी, जिसकी वजह से स्मृतिरेखा के कंधों पर पूरे घर की जिम्मेदारी आ गई। जब कोरोना वायरस की वजह से स्मृतिरेखा की नौकरी चली गई तो बाद में उन्होंने बड़ी ही हिम्मत से काम लिया। इस कठिन परिस्थिति में अच्छे-अच्छे लोगों की बुद्धि काम करना बंद कर देती है परंतु स्मृति रेखा बहुत हिम्मत वाली थीं,

उन्होंने भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) “मु सफाईवाला” के कचरा संग्रहण को चलाना शुरु कर दिया। और इस काम से उनको दिहाड़ी के रूप में जितने भी रुपए मिलते हैं वह अपना घर चलाती हैं। कचरा उठाने वाली गाड़ी चलाकर स्मृतिरेखा अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही है। इस कठिन समय में वह मजबूती के साथ अपने परिवार का सहारा बनी हुई हैं।

आपको बता दें कि कोरोना महामारी के बीच अक्सर इसी तरह की कोई ना कोई खबर सुनने को मिल ही जाती है जिसको जानने के बाद मन को बेहद दुख पहुंचता है। कोरोना महामारी ने देश भर के लोगों का जीवन पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। सबसे बड़ी समस्या आर्थिक तंगी है। लोगों की नौकरी जाने की वजह से घर का गुजारा चला पाना भी बहुत ही मुश्किल हो रहा है। इसी बीच स्मृतिरेखा ने जिस हिम्मत से काम लिया है, हम उनके जज्बे को सलाम करते हैं।

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