धार्मिक

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से कट जाते हैं पाप, यहां भक्त की पुकार पर प्रकट हुए थे भगवान शिव

सावन का महीना बहुत ही जल्द शुरू होने वाला है 25 जुलाई 2021 से सावन का पवित्र महीना शुरू होगा। इस महीने में भगवान शिव जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। ऐसा बताया जाता है कि भोलेनाथ की पूजा अगर सावन के पवित्र महीने में विधि-विधान पूर्वक और सच्ची श्रद्धा से की जाए तो इसे भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

वैसे देखा जाए तो भोलेनाथ के हर स्वरूप की पूजा करने से दोगुना अधिक लाभ मिलता है। अगर व्यक्ति सावन के पूरे महीने में व्रत का पालन करता है तो उसे भगवान शिव जी से मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। इसके साथ ही ऐसा भी बताया जाता है कि जो व्यक्ति 12 ज्योतिर्लिंगों में से किसी एक के दर्शन कर ले तो उसका भाग्य ही खुल जाता है। आज हम आपको दसवें ज्योतिर्लिंग नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में बताने वाले हैं।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रांत में द्वारकापुरी से लगभग 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। इस पवित्र ज्योतिर्लिंग के दर्शन की शास्त्रों में महिमा बताई गई है। ऐसा बताया जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा पूर्वक इसकी उत्पत्ति और माहात्म्य की कथा सुनता है उसके सारे पाप कट जाते हैं और उसको समस्त सुखों की प्राप्ति होती।

भगवान शिव जी एक ऐसे देवता हैं जो अपने भक्तों की पुकार जरूर सुनते हैं। ऐसे में एक परम भक्त के प्राणों की रक्षा के लिए कारागार में भगवान शिव जी का स्वरूप शिवलिंग प्रकट हुआ था। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में ऐसा बताया जाता है कि यह मंदिर करीब ढाई हजार वर्ष पुराना है। शिव पुराण के अनुसार नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के पीछे जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में बताएंगे।

पौराणिक कथा के अनुसार सुप्रिय नामक वैश्य गुजरात में रहता था, जो भगवान शिव जी का परम भक्त था। यह भोलेनाथ की पूजा के बिना अन्न का दाना भी ग्रहण नहीं करता था। एक बार सुप्रिय दल के साथ नाव से वह कहीं जा रहा था। नाव दारूक राक्षस के वन की ओर चली गई, जहां दारुक के अनुचरों ने बंदी बनाकर सुप्रिय को कारागार में डाल दिया था।

सुप्रिय की शिव भक्ति कारागार में भी नहीं रुकी, वह लगातार भगवान शिव जी की भक्ति करता रहा। जब दारुक ने यह देखा तो उसको बहुत ज्यादा गुस्सा आया और उसने सुप्रिय के वध का आदेश दे दिया था परंतु उस दौरान सुप्रिय निरंतर भगवान शिवजी से रक्षा की गुहार लगाता रहा। अपने भक्त की पुकार सुनकर वहां पर शिव परिवार सहित एक शिवलिंग प्रकट हुआ।

भगवान शिव जी ने अपने भक्त सुप्रिय को पाशुपत प्रदान किया था, जिससे उसने दारुक और उसके राक्षसों का वध कर दिया और वह शिवधाम को चला गया था। प्रभु के निर्देशानुसार ही उस ज्योतिर्लिंग का नाम नागेश्वर पड़ा है। आपको बता दें कि नागेश्वर परिसर में भगवान शिव जी की ध्यान मुद्रा की 80 फीट ऊंची प्रतिमा विराजमान है, जिसको कई किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग र्भगृह सभामंडल में स्थित है। ज्योतिर्लिंग के पीछे माता पार्वती की मूर्ति स्थापित है। गर्भगृह में 4:00 बजे के बाद भक्तों को दर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाती है।

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