विशेष

किसान की 5 बेटियों ने पिता का नाम किया रोशन, दो पहले हो चुकी हैं सेलेक्ट, अब 3 एक साथ बनीं अफसर

मौजूदा समय में बेटा और बेटी में कोई भी फर्क नहीं है। कई क्षेत्रों में बेटियां अपने माता-पिता के साथ साथ पूरे देश का नाम रोशन कर रही हैं परंतु आजकल के समय में भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो बेटियों से ज्यादा बेटों की इच्छा रखते हैं। अगर घर में बेटी जन्म लेती है तो कुछ लोग परेशान हो जाते हैं परंतु बेटियां ही घर की रौनक होती हैं और बेटियां ही अपने परिवार के साथ-साथ देश का नाम रोशन कर रही है। वर्तमान समय में बेटियां किसी से भी कम नहीं हैं।

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भैरूसरी गांव की तीन सगी बहनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो एक साथ RAS में सिलेक्ट हुई हैं। इन तीनों बहनों ने एक साथ अफसर बनकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर परिवार और इलाके का नाम रोशन किया है।

आपको बता दें कि राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के भैरूसरी गांव में किसान सहदेव सहारण का परिवार रहता है। उनकी पांच बेटियां हैं और पांचो पूरे इलाके के लिए मिसाल बन चुकी हैं। इनकी दो बड़ी बेटियां पहले ही राज्य सेवा की अधिकारी हैं। बेटियों की इस उपलब्धि की चर्चा हनुमानगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में हो रही है। RAS में चयनित हुई तीन बहने रीतू, अंशु और सुमन ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिखाया है कि बेटियां बोझ नहीं होती।

सहदेव का ऐसा कहना है कि उनकी दो बड़ी बेटियों में से एक रोमा का साल 2011 और दूसरी मंजू का 2012 में राज्य सेवा में चयन हुआ था तो छोटी बहनों को भी उनसे प्रेरणा मिली। दोनों बड़ी बहन ने भी तीनों की लगातार पढ़ाई को लेकर मदद करती रहीं। रीतू, अंशु और सुमन का ऐसा कहना है कि दो बड़ी बहनों का राज्य सेवा में चयन होने के बाद उन्होंने अपना लक्ष्य तय कर लिया था कि वह अफसर बनने की तैयारी शुरू करेंगी। तीनों ने RAS अफसर बनने का लक्ष्य रखा और उसी के हिसाब से तैयारी शुरू की। उन्होंने बताया कि तीनों ने गांव के सरकारी स्कूल में एक साथ पांचवी कक्षा तक पढ़ाई की है उसके बाद अलग-अलग स्कूलों में पढ़ाई की।

आपको बता दें कि तीनों में अंशु ने ओबीसी गर्ल्स में 31, रीतू ने 96 और सुमन ने 98वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। अब पांचों बेटियों के अफसर बनने के बाद उनके पिता सहदेव का ऐसा कहना है कि बेटे की चाहत रखने वाले अब सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा है कि हमने बेटियों को कभी अभिशाप नहीं समझा बल्कि उन्हें हीरे की तरह निखारा। उनकी हर बात पर ध्यान दिया। पिता सहदेव का ऐसा कहना है कि मैंने जब बेटियों को पढ़ाया तो समाज के लोगों ने ताना दिया कि बेटियों को इतना पढ़ा कर क्या करोगे, इन्हें दूसरे घर जाकर काम करना है लेकिन उन्होंने समाज की परवाह नहीं की।

आपको बता दें कि भारतीय वन सेवा अधिकारी प्रवीण कासवान ने अपने एक ट्वीट में इन बेटियों की जानकारी दी है। उन्होंने यह लिखा है कि “किसान सहदेव सहारण की सभी पांच बेटियां अब आरएएस अधिकारी हैं। रीतू, अंशु और सुमन का चयन हुआ है। अन्य दो पहले ही सेवा में थीं। परिवार और गांव के लिए कितना गर्व का क्षण है।”

Back to top button