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21 वर्षीय शालिनी ने 60 लाख के पैकेज में गूगल में करेंगी काम, बिहार समेत देश का नाम भी किया ऊँचा

12वीं की शिक्षा दिल्ली से पूरी हुई और 96.2 प्रतिशत अंक लाकर वह स्कूल टॉपर रहीं

आजकल के जमाने में लड़का और लड़की में कोई भी भेद नहीं है। पहले के जमाने में अक्सर लोगों का ऐसा मानना था कि लड़कियां जीवन में लड़कों से कभी आगे नहीं बढ़ सकती हैं। पहले के जमाने में लड़कियों का स्कूल जाना, पढ़ना-लिखना अच्छा नहीं माना जाता था। लड़कियों को सिर्फ घरेलू कामों में ही गिना जाता था परंतु मौजूदा समय में कई क्षेत्रों में लड़कियां ऐसा काम कर रही हैं, जिससे माता-पिता के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन हो रहा है। इसी बीच भागलपुर जिले के सुल्तानगंज की शालिनी झा ने महज 21 साल की आयु में राज्य ही नहीं बल्कि देश का नाम भी गर्व से ऊंचा कर दिया है।

आपको बता दें कि 21 वर्षीय शालिनी झा को विश्व की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी गूगल ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम करने का अवसर दिया है। गूगल में चयनित होने वाली शालिनी भागलपुर जिले की पहली बेटी हैं। महज 21 साल की शालिनी झा को गूगल ने 60 लाख रूपए का वार्षिक पैकेज दिया है। इस बिहार की बेटी ने इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसकी वजह से हर तरफ लोग उसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।

आपको बता दें कि शालिनी झा के पिता का नाम कामेश्वर झा है और माताजी का नाम दिव्या झा है। उनके पिता गैलवेनो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में प्रबंधक हैं। वर्तमान में वह भागलपुर के सुल्तानगंज में रहते हैं। शालिनी झा स्व. नाथेश्वर झा की प्रपौत्री हैं, वह हेड मास्टर कृष्णनंदन हाई स्कूल थे और उनके दादा स्व. उमेश्वर झा हैं, वह मुरारका महाविद्यालय के रसायन विभागाध्यक्ष थे। माधुरी झा उनकी दादी हैं। माधुरी झा का ननिहाल मधेपुरा (वार्ड नंबर 20, स्‍टेशन रोड में है। उनके नाना स्व. अमरनाथ झा “पन्ना बाबू” थे। वह झारखंड बिजली विभाग जीएम थे।

शालिनी इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वूमेन, कश्मीरी गेट, दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं और अभी वह इंजीनियरिंग के आखिरी साल में पढ़ रही हैं। उनकी 12वीं की शिक्षा मॉडर्न इंटरनेशनल स्कूल, विज्ञान स्ट्रीम से द्वारका दिल्ली से पूरी हुई और 96.2 प्रतिशत अंक लाकर वह स्कूल टॉपर रहीं। उन्होंने दसवीं कैनेडी पब्लिक स्कूल, पालम कॉलोनी, दिल्ली से की।

शालिनी का ऐसा कहना है कि वह अपने पिता कामेश्वर झा को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। उन्होंने कहा कि उनके संयम और पढ़ाई के प्रति समर्पण ने शालिनी को निरंतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बल पर अपना एवं अपने परिवार का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। शालिनी के पिता जी का ऐसा कहना है कि पढ़ाई एक तपस्या है। जिसने यह तपस्या पूरी निष्ठा एवं एकाग्रता से कर ली। वह जीवन के दूसरे पायदान सुखी एवं संतुष्ट रहेगा।

शालिनी ने यह बताया कि उनकी मां दिव्या झा, बहन आकांक्षा झा और भाई देवेश्वर झा ने हर कदम पर उनपर भरोसा जताया है। इसके साथ ही उन्होंने उनका हौसला भी बढ़ाया। शालिनी अपनी इस सफलता में अपने सभी अध्यापकों की भी अहम भूमिका मानती हैं जिन्होंने समय-समय पर प्रोत्साहित कर मार्गदर्शन किया है।

शालिनी झा अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी दादी माधुरी झा को भी देती हैं। उन्होंने बताया कि वह हमेशा कहती हैं कि बेटा तुम्हें कुछ करके दिखाना है। उनकी दादी ने हमेशा शालिनी का हौसला बढ़ाया है। शालिनी का ऐसा कहना है कि दादी के आशीर्वाद, स्नेह, प्यार और सहयोग की वजह से ही वह आज इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं। उनके पूरे परिवार के सदस्यों ने पूरा सहयोग किया है।

आपको बता दें कि शालिनी झा को कॉलेज की ऑन केंपस प्लेसमेंट ड्राइव में ऑस्ट्रेलियन सॉफ्टवेयर कंपनी अटलैस्सियन से 51.5 लाख का पैकेज मिला। उन्हें डाटा स्टोरेज कंपनी वेस्टर्न डिजिटल में 2 महीने की इंटर्नशिप करने के बाद प्री प्लेसमेंट ऑफर मिला परंतु इसके बावजूद भी वह ऑफ केंपस कोशिश करती रहीं और गूगल में उनके करियर पोर्टल के द्वारा अप्लाई किया। 7 राउंड इंटरव्यू हुआ। इंटरव्यू का नतीजा आया और उनके अनुभव और शिक्षा के आधार पर उन्हें गूगल इंडिया में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद के लिए 60 लाख वार्षिक पैकेज दिया गया। शालिनी का ऐसा कहना है कि उन्होंने अभी उसे ज्वाइन नहीं किया है। बीटेक की पढ़ाई पूरी करके जुलाई 2021 में वह गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर ज्वाइन करेंगी।

शालिनी ने यह कहा है कि उनका बचपन से ही पढ़ाई में बहुत मन लगता है। उनका मानना है कि कभी भी पढ़ाई किसी और को दिखाने या फिर डर से नहीं करनी चाहिए बल्कि खुद के लिए पढ़ना चाहिए। 16 से 18 घंटे बिना ध्यान लगाए पढ़ने से बेहतर होगा कि महज 10 घंटे ही ध्यान पूर्वक पढ़ाई करें। उन्होंने इंटरनेट नेटवर्किंग साइट्स पर सीमित समय देने की बात भी कही है।

शालिनी का कहना है कि हमेशा व्यक्ति को अच्छे लोगों से दोस्ती करनी चाहिए। इससे व्यक्तित्व में निखार आता है। उनका कहना है कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती है और व्यक्ति को हमेशा पढ़ाई करते रहना चाहिए और अच्छी पुस्तकें पढ़नी चाहिए। उनका कहना है कि कभी असफल हो जाएं तो ऐसी स्थिति में बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए बल्कि कमियों को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी होती है। उन्होंने असफलता पाने के बाद ही बेहतर मुकाम हासिल किया है।

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