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रेल मंत्री बनने के बाद पहली बार जोधपुर पहुंचे अश्विनी वैष्णव, मां बेटे को देख हुई भावुक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री बनने के बाद अश्विनी वैष्णव पहली बार अपने गृह जिले जोधपुर पहुंचे। यहां पर उनके स्वागत के लिए लोगों की भारी भीड़ इकट्ठी हो गई। बता दें कि रेल मंत्री बनने के बाद अश्विनी वैष्णव पूरे 8 महीने के पश्चात अपने घर पर लौटे हैं। ऐसे में शहरवासियों ने उनके स्वागत में पलक पावड़े बिछा दिए। जगह-जगह पर उनका जोरदार स्वागत किया गया।

जब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अपनी कार से उतरे तो वह सीधे ही अपने घर की चौखट पर पहुंचे और सबसे पहले वह अपनी मां के पास गए। उन्होंने सबसे पहले अपनी माँ के पैर छुए। काफी लंबे समय बाद अपने बेटे को देखकर माँ काफी भावुक हो गायीं। जब मंत्री जी ने अपनी मां के पैर छुए तो मां ने उन्हें गले लगा लिया। गले लगाते वक्त मां बहुत भावुक हो गईं। वहीं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी अपनी मां की बाहों में भाव विभोर हो गए।

8 महीने के बाद जब अश्विनी वैष्णव घर लौटे तो मां-बेटे आपस में गले मिलकर दोनों ही भावुक हो उठे थे। माता की आंखों में खुशी के आंसू निकल गए। जैसे-तैसे मंत्री साहब ने खुद को संभाला, इसके साथ ही उन्होंने अपनी मां को भी संभाला लेकिन जब मां गले मिलकर अलग हुई तो फिर माँ ने उनके चेहरे को चूम लिया। यह दृश्य काफी भावुक कर देने वाला था। इस समय के दौरान जो भी लोग वहां पर मौजूद थे वह भी उन्हें देखकर भावुक हो उठे थे। मां बेटे के इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद परिवार के अन्य सदस्यों की भी आंखें नम हो गई थीं।

जब मंत्री जी जोधपुर पहुंचे तो पुष्प वर्षा कर उनका जोरदार स्वागत किया गया। मां के साथ अश्विनी वैष्णव पिता दाऊलाल से भी मिले और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव परिवार के अन्य सदस्यों से मिले। इस अवसर के दौरान मंत्री के भाई-भाभी और अन्य सदस्यों ने भी उनका शानदार स्वागत किया। अश्विनी वैष्णव ने घर लौटने, परिवार के बीच पहुंचने के बाद मीडिया से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि “शिक्षा स्कूल से मिलती है और संस्कार घर से मिलते हैं। आज मैं अपने घर लौटा हूं। अपने परिवार से मिला हूं।” उन्होंने भावुक होने को लेकर कहा कि “इस मौके पर भावुकता स्वाभाविक ही है।”

आप सभी लोग तस्वीरों में देख सकते हैं कि जब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अपने घर जोधपुर पहुंचे तो किस प्रकार से उनका जोरदार स्वागत किया गया। मां ने अपने बेटे को तिलक लगाकर स्वागत किया। इस मौके पर परिवार के सभी सदस्य मौजूद थे। जब मां-बेटे मिले तो यह पल बेहद भावुक कर देने वाला था। दोनों ऐसे गले मिले मानो बरसो बाद मिले हों। दोनों ही भावुक हो उठे। जब अश्विनी वैष्णव अपने पिता दाऊलाल से मिले तो दोनों की नजरें मिली और अश्विनी वैष्णव कदमों में झुक गए। पिता ने उन्हें संभाला और गले लगा लिया। वैसे चाहे बच्चा कितना भी बड़ा हो जाए। मां का प्यार-दुलार बच्चों के लिए कभी नहीं बदलता है। मां के लिए उसका बच्चा जीवन भर बच्चा ही रहता है और माँ हमेशा अपने बच्चों को दुलार करती है।

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