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क्या पति भी रख सकते हैं पत्नी के लिए करवा चौथ का व्रत? जानिए इससे जुड़े आठ दिलचस्प नियम

करवा चौथ का व्रत एक ऐसा त्यौहार है जो सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास माना जाता है। करवा चौथ का व्रत पति की दीर्घायु और मंगल कामना हेतु सुहागिन महिलाएं रखती हैं। हर वर्ष कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का त्यौहार मनाया जाता है। सुहागिन महिलाएं हर साल इस दिन का बेसब्री से इंतजार करती हैं। करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निराहार और निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत तोड़ने से पहले महिलाएं दुल्हन की तरह सजती-धजती हैं। इसके बाद एक गोल करवा या आटा छन्नी में पति का चेहरा और चंद्र के दर्शन एवं पूजन करने के पश्चात् ही अपना व्रत तोड़ती हैं।

आपको बता दें कि करवा चौथ का पर्व रिश्तो को मजबूत बनाने वाला माना गया है, जिसकी वजह से यह पति-पत्नी दोनों के लिए खास महत्व रखता है। इस साल करवा चौथ का व्रत 24 अक्टूबर, दिन रविवार को रखा जाएगा। ऐसी स्थिति में करवा चौथ का व्रत पूरे नियमानुसार रखना चाहिए। मान लीजिए अगर आप बीमार हैं या फिर कोई और विशेष स्थिति की वजह से करवा चौथ का व्रत नहीं रख सकती हैं तो ऐसे में पति भी यह व्रत रख सकता है। इससे जुड़े हुए कुछ नियम भी हैं, जिनका पालन हर महिला को अवश्य करना चाहिए। तो चलिए जानते हैं इन नियमों के बारे में।

जानिए करवा चौथ व्रत के नियम

1. आपको यह पता होना चाहिए कि सूर्य उदय होने के बाद ही करवा चौथ का व्रत आरंभ होता है। ऐसे में आप सूर्य निकलने से पहले किसी भी चीज का सेवन कर सकती हैं। यही कारण है कि सूर्य उगने से पहले सभी घरों में सरगी (मीठी खीर और ड्राई फ्रूट्स) खिलाई जाती है। इन चीजों का सेवन करने से महिला के अंदर दिनभर ऊर्जा बनी रहती है, जिससे वह करवा चौथ का व्रत सरलता पूर्वक रख सकती हैं।

2. अगर किसी महिला ने करवा चौथ का व्रत शादी के बाद पहली बार रखा है और व्रत में उसे फलाहार या जल ग्रहण करवा दिया गया है तो ऐसे में वह अन्य करवा चौथ व्रत पर निराहार और निर्जल या फलाहार लेकर करवा चौथ का व्रत रख सकती है। नियम यह कहता है कि करवा चौथ के व्रत में महिला चंद्रमा के निकलने तक जल ग्रहण नहीं कर सकती परंतु अगर व्रत के दौरान कोई महिला बीमार चल रही है तो ऐसे में वह जल का सेवन कर सकती है।

3. अक्सर देखा गया है कि सुहागिन महिलाओं के अलावा जिन लड़कियों का विवाह तय हो गया है वह भी व्रत करना चाहती हैं। ऐसी स्थिति में वह लड़कियां यह व्रत कर सकती हैं परंतु जो लड़कियां कुंवारी हैं, अगर वह करवा चौथ का व्रत कर रही हैं तो उनको चांद की बजाए तारों को देखकर यह व्रत खोलना चाहिए।

4. शास्त्रों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि अगर कोई महिला करवा चौथ के व्रत पर बीमार हो जाती है तो ऐसी स्थिति में उस महिला का पति यह व्रत रख सकता है। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं आजकल मॉडर्न जमाना है। ऐसे में कई पति भी अपनी पत्नी के लिए साथ में करवा चौथ का व्रत रख लेते हैं।

5. करवा चौथ व्रत के दिन महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना होगा कि वह इस दिन करवा चौथ की कथा जरूर सुनें। ऐसा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। वहीं जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं मिल पाया है, उनको संतान सुख की भी प्राप्ति होती है।

6. अगर करवा चौथ की कथा सुन रही हैं तो उस समय के दौरान आपके पास साबुत अनाज और मिष्ठान का होना आवश्यक है। जब करवा चौथ की कथा खत्म हो जाए तब बहुएं अपनी सास को बायना देती हैं।

7. जो सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, उनको इस बात का ध्यान रखना होगा कि इस दौरान काले या सफेद रंग के कपड़े ना पहनें। आप व्रत वाले दिन लाल, पीले जैसे चमकदार रंग के वस्त्र धारण कर सकती हैं। इसके अलावा व्रत के दिन सफेद रंग की चीजों का दान भी नहीं करना चाहिए।

8. करवा चौथ व्रत करने वाली सुहागिन महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना होगा कि चंद्रमा निकलने से 1 घंटे पहले शिव परिवार यानी भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान आप ध्यान रखें कि आपका मुंह पूर्व दिशा की तरफ हो। जब आपकी पूजा समाप्त हो जाए और चांद निकल आए तो आप चंद्रमा की पूजा कीजिए और अर्घ्य दीजिए। इसके पश्चात आप अपने पति की लंबी आयु की कामना करने के पश्चात आप उन्हें तिलक लगाएं। इसके बाद आपको अपने पति और घर के अन्य बड़े लोगों का आशीर्वाद लेना चाहिए। आखिर में आप अपने पति के हाथों से जल पीकर आप अपने व्रत को तोड़ सकती हैं।

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