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Parle-G ने कोरोना काल के बीच तोड़ा 80 साल का रिकॉर्ड, कम कीमत के पीछे ये है वजह

देश दुनिया में इस समय एक ही बीमारी का जिक्र हो रहा है। ऐसे में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत में 24 मार्च से ही लॉकडाउन लागू कर दिया गया जिसके बाद 7 जून तक लॉकडाउन जारी रखा है। वहीं हाल ही में लॉकडाउन में केंद्रीय सरकार द्वारा बहुत सारी छूट भी दी जाने लगी। लेकिन लॉकडाउन के बीच Parle-G बिस्किट ने ऐसा रिकॉर्ड बना डाला है जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे।

मार्किट शेयर में 5 फीसदी का इजाफा

आपको बता दें कि Parle-G बिस्किट ने लॉकडाउन के बीच अपनी शुरूआत से लेकर अब तक सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना डाला है। 1938 से पूरे भारत में बिक रहे पारले- जी ने महज 3 महीने में अपना रिकॉर्ड बनाया है। जानकारी के लिए बता दें कि पारले- जी देश में सबसे ज्यादा खरीदे जाने वाला ब्रांड है। हालांकि अभी तक पारले प्रोडक्ट्स कंपनी ने इस बात का जिक्र कभी नहीं किया कि कुल कितनी बिक्री बढ़ी है लेकिन खबरों के मुताबिक कुल मार्केट शेयर में पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही ये भी बताया गया कि 80 से 90 फीसदी की ये ग्रोथ केवल पारले- जी की बिक्री से आई है। कंपनी के कैटेगिरी हेड मयंक शाह ने कहा कि ये अविश्वनीय लग रहा है।

सस्ती कीमत रखने की बड़ी वजह

वहीं लॉकडाउन में ये बात भी देखने को मिली है कि ज्यादातर लोगों ने अपने घरों में पारले- जी बिस्किट को रखना पसंद किया है। इतना ही नहीं बिस्किट की कीमत पांच रूपये होने के कारण लोगों को इसे खरीदना ज्यादा आसान था। इस दौरान खास बात ये भी है कि संकट में जरूरतमंद लोगों को बिस्किट बांटे गए जिसमें पारले- जी बिस्किट सबसे ज्यादा संख्या में बांटे गए हैं। ऐसे में चाहे गांव हो या फिर शहर पारले- जी की उपलब्धता को कभी कम नहीं होने दिया गया। वहीं रिटेल आउटलेट्स पर पारले- जी बिस्किट खत्म होने के सात दिनों के भीतर पहुंचाया जा रहा था। क्योंकि ऐसे समय में जो लोग ब्रेड नहीं खरीद सकते थे, वो भी पारले जी को खरीद रहे थे।

इस सफलता के बारे में बात करते हुए मयंक शाह ने बताया कि लॉकडाउन में लोगों की स्थिति ऐसी थी कि उनके पास केवल Parle-G बिस्किट ही लंच, डिनर और नाश्ते का काम कर रहा था। वहीं इसकी डिमांड देखते हुए कई राज्य सरकारों ने Parle-G की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बोला। इसके साथ ही कई एनजीओ ने भी इसको जरूरतमंदों को बांटने के लिए खरीदा।

देश भर में सिर्फ 130 फैक्ट्री

पारले प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मार्किट में इसकी कितनी भारी डिमांड होगी। वहीं पारले- जी प्रोडक्ट्स की पूरे भारत में कुल 130 फैक्ट्रियां हैं जिनमें से लॉकडाउन के दौरान 120 में लगातार पारले- जी का उत्पादन हो रहा था। इसके अलावा 10 कंपनी के स्वामित्व वाली जगह हैं। वहीं ये ब्रांड 100 रुपये प्रति किलो से कम वाली कैटेगिरी में आता है, जो बिस्किट उद्योग से एक-तिहाई इनकम जुटाता है। जिसका कुल बिस्किट की बिक्री में इसका शेयर 50 फीसदी है।

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