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लॉकडाउन में बंद हुए स्कूल तो इस देश में बच्चियां होने लगी प्रेग्नेंट, परेशान हुई सरकार

कोरोना वायरस महामारी दुनियाभर में लोगों के लिए परेशानी की वजह बन रही है। वायरस से संक्रमित होने के चलते लोगों की जानें जा ही रही हैं तो इससे मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है। छोटे देश तो इस महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लेकिन अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में इस महामारी के चलते एक ऐसी परेशानी शुरू हो गई है जिसके बारे में सुनकर हर किसी को हैरानी हो रही है।

जिम्बॉब्वे सरकार के लिए खड़ी हुई नई परेशानी

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते दुनिया भर में कई तरह की पाबंदिया लागू की गई हैं। जिससे एक जगह ज्यादा लोग इकट्ठा ना हो। कोरोना महामारी के चलते हर जगह स्कूल-कॉलेज बंद हो गए हैं। ऐसे में जिम्बॉब्वे सरकार के लिए नई परेशानी खड़ी हो गई है। दरअसल, इस देश में हाल के दिनों में स्कूली बच्चियों के प्रेग्नेंट होने के मामले तेजी से बढ़े हैं।

12-13 साल में हो रही प्रेग्नेंट

जिंबाब्वे सरकार लगातार कम उम्र की लड़कियों में प्रेग्रेंसी को लेकर परेशान है लेकिन बीते सालों कहीं ज्यादा युवतियां गर्भवती हुई हैं। जिसने परेशानी को और बढ़ा दिया है। जिम्बॉब्वे में कोरोना काल के दौरान लड़कियां 12-13 साल की उम्र में ही प्रेग्नेंट हो रही हैं और स्कूल छोड़ रही हैं। सरकार और कार्यकर्ताओं ने इसके लिए कई कदम भी उठाए हैं, लेकिन इसमें किसी तरह का सुधार नहीं देखा जा रहा है।

नहीं हो रहा कोई सुधार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के कारण दवाएं ना मिल पाने का भी लड़कियों की सेहत पर असर पड़ा रहा है। इस कारण ये लड़कियां गर्भ निरोधकों और क्लीनिकों की पहुंच से दूर हो गईं। सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए कई सख्त कदम भी उठाए हैं लेकिन हालात में बहुत सुधार नहीं हो रहा है।

सरकार ने परेशान होकर लिया ये फैसला

बता दें कोरोना से पहले इस देश में हर तीन लड़कियों में से एक की शादी 18 साल से पहले कर दी जाती थी। इसके कई कारण हैं, जैसे- लड़कियों का प्रेग्नेंट हो जाना, बाल विवाह को लेकर कानून का सख्त न होना, गरीबी, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथा।

कम उम्र में प्रेग्नेंट हो रही लड़कियों की समस्या को देखते हुए जिंबाब्वे सरकार ने 2020 में कानून में बदलाव करते हुए प्रेग्नेंट लड़कियों को स्कूल जाने की अनुमति दी थी। बाद में कोरोना आ गया और स्कूलों को बंद करना पड़ा। ऐसे में अब सरकार ने स्कूलों को भी कुछ नियमों के साथ खुला रखने का फैसल लिया है। देश में कई सामाजिक संगठन भी इसके लिए काम कर रही हैं कि लड़कियां कम उम्र में प्रेग्नेंट ना हों और उनकी पढ़ाई जारी रहे।

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