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‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ गाने के पीछे हैं बड़ी दिलचस्प कहानी, लता ने गाने से कर दिया था इनकार

स्वर कोकिला लता मंगेशकर का रविवार को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें 8 जनवरी को कोविड संक्रमित होने के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती किया गया था। कई दिनों से उनका इलाज चल रहा था लेकिन लता जी आख़िरकार जिंदगी से जंग हार गईं।

30 हजार से ज्यादा गाने गा चुकी हैं

भारत की यह दिग्गज गायिका इंडस्ट्री में 30,000 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दे चुकी हैं। लता मंगेशकर आज लोगों की पसंदीदा गायिकाओं में शामिल हैं। दीदी के सभी गानों को इस तरह से गाया है कि हर भारतीय इस गाने को सुनकर उसमें खो जाता है। अपने मधुर गानों से लोगों का मनोरंजन करने वालीं लता जी के एक गाने ने सभी की आंखों में आंसू ला दिए थे। इतना ही नहीं उनके इस गाने को सुन देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी रो पड़े थे। आइए जानते हैं गायिका के इस गाने से जुड़े किस्सों के बारे में-

एल्यूमिनियम फॉयल पर लिखा था गाना

26 जनवरी हो या 15 अगस्त लोगों में देशभक्ति का जोश भरने वाला गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी’ आज भी देश के लिए कुर्बान हुए शहीदों की याद दिलाता है। यह गाना सुनने में जितना भावुक है, गाने में भी उतना ही भावुक था। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाने को शब्द कवि प्रदीप ने दिए है।

बहुत ही कम लोग इस बात को जानते होंगे कि कवि प्रदीप के दिमाग में इस गाने के बोल तब आए जब वो मुंबई माहीम बीच पर टहल रहे थे। उस वक्त उनके पास ना पेन था और ना ही कागज। ऐसे में उन्होंने पास से गुजर रहे अजनबी से पेन मांगा और सिगरेट के एल्यूमिनियम फॉयल पर लिखा।

लता मंगेशकर ने गाना गाने से कर दिया था इनकार

कवि प्रदीप अपने इस गाने को आवाज लता मंगेशकर से ही दिलवाना चाहते थे। इन्होंने लता दीदी से बात भी कर ली थी। लेकिन किसी बात को लेकर लता मंगेशकर और कवि प्रदीप के बीच मतभेद हो गया था। जिसके बाद लता जी ने इस गाने को गाने से इनकार कर दिया। फिर लता की बहन आशा भोंसले से इस गाने को गाने के लिए कहा गया। हालांकि प्रदीप इस गाने को लता दीदी की आवाज मिले इस पर अड़े हुए थे। उन्होंने लंबे समय तक इस गाने के लिए लता दीदी को मनवाया और फिर लता दीदी इस गाने को अपनी आवाज देने के लिए मांग गई।

पहली बार गाना सुन भीग गई थी लता जी की आंखे

जब लता जी ने कवि प्रदीप से इस गाने को सुना तो वह इसे सुन रो पड़ी थीं। इस गीत को गाने के लिए गायिका ने प्रदीप के सामने शर्त रखी थी कि जब इस गाने का अभ्यास होगा तो खुद प्रदीप को वहां मौजूद हो रहना होगा। ऐसे में लता जी की इस शर्त को प्रदीप ने स्वीकार कर लिया और फिर यह गाना इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

गाना सुनते ही रो पड़े थे जवाहरलाल नेहरू

लता जी ने जब इस गाने को नेशनल स्टेडियम में प्रधानमंत्री नेहरू के सामने गाया तो उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। लता जी की आवाज में इस गाने को सुनने के बाद नेहरू जी गायिका से बात करना चाहते थे। इस पर लता मंगेशकर काफी घबरा गई थीं, क्योंकि उन्हें लगा था कि उनसे कोई गलती हो गई है। लेकिन जब वह पंडित जी से मिली तो उनकी आंखों में आंसू थे।

इस दौरान उन्होंने लता जी से कहा लता तूने मुझे रुला दिया। उन्होंने ये भी कहा था कि, जो भी इस गाने से प्रेरित नहीं हो सकता, मेरे खयाल से वो हिंदुस्तानी नहीं है। ऐ मेरे वतन के लोगों यह गीत आज भी लोगों के बीच काफी खास है। इसे सुनते ही हर देशवासी के अंदर जोश और जुनून दौड़ पड़ता है।

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