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27 साल से लता मंगेशकर की जी जान से सेवा कर रहे थे महेश राठौड़, अब उनके जाने से हुए बदहवास

स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी का रविवार 6 फरवरी 2022 की सुबह मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। जैसे ही लता मंगेशकर जी के निधन की खबर सामने आई, उसके बाद ही पूरा देश गमगीन है। अभी तक लता जी के चाहने वालों के लिए इस बात पर यकीन करना काफी मुश्किल हो रहा है कि अब वह हमारे बीच में नहीं रहीं।

पूरे देश के लोगों को लता मंगेशकर के निधन का काफी बड़ा सदमा लगा है। वहीं उससे भी बड़ा सदमा उनके परिवार और उस शख्स को लगा है जो सालों से लता मंगेशकर जी की देखभाल कर रहा था। वह शख्स कोई और नहीं बल्कि महेश राठौड़ हैं, जिन्होंने अपने जीवन का 27 साल लता मंगेशकर जी की सेवा में लगा दिया।

जैसे ही लता मंगेशकर जी के निधन की खबर महेश राठौड़ को मिली तो उनके लिए खुद को संभाल पाना बहुत मुश्किल हो गया। रो-रो कर महेश राठौड़ का बुरा हाल हो चुका है। वह लगातार लता दीदी को याद कर रहे हैं और बेसुध हो जा रहे हैं।

महेश का है रो-रोकर बुरा हाल

लता मंगेशकर के निधन की खबर सुनने के बाद महेश राठौड़ का बुरा हाल हो चुका है। महेश राठौड़ का ऐसा कहना है कि वह बुरी तरह से टूट चुके हैं। ऐसा लग रहा है कि वह इस दुनिया में अकेले पड़ गए हैं। अमरेली के मोरंगी गांव के रहने वाले महेश राठौड़ को लता मंगेशकर जी भाई मानती थीं और 2001 से उन्हें राखी बांधती आ रही थीं।

महेश राठौड़ यही सोच-सोचकर इतने ज्यादा दुखी हैं कि उनकी आंखों के आंसू रुक नहीं पा रहे हैं। वह लगातार रोते ही जा रहे हैं और अब उनकी दीदी कभी वापस नहीं आएंगी। उनकी कलाई सुनी ही रह जाएगी। महेश राठौड़ को कभी भी अपनी लता दीदी को देखने का मौका नहीं मिल पाएगा।

1995 में घर छोड़ आए मुंबई, लता जी के घर मिली नौकरी

आपको बता दें कि महेश राठौड़ की आंखों में हजारों सपने थे जिसके चलते वह 1995 में अपना घर छोड़कर मुंबई आए थे। यहां पर वह अपने लिए काम की तलाश करने लगे। एक रोज जब वह मुंबई में महालक्ष्मी के पास एक मंदिर में बैठे हुए थे तो एक आदमी ने आकर उसे कहा लता मंगेशकर के घर में एक वैकेंसी है। जब महेश ने यह सुना तो उनको ऐसा एहसास हुआ कि उनके ग्रामीण परिवेश से होने का मजाक उड़ाया जा रहा है।

लता जी के फाइनेंस से लेकर दवाई तक का ध्यान रखा

महेश राठौड़ के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे लेकिन इसके बावजूद भी वह लता मंगेशकर जी के घर पर जैसे-तैसे पहुंची गए और फिर यहीं के होकर रह गए। महेश राठौड़ ने धीरे-धीरे लता जी के दिल में अपने लिए एक अलग ही जगह बना ली। उन्होंने उनकी देखरेख की पूरी जिम्मेदारी संभाली।

महेश राठौड़ लता जी के सिर्फ केयरटेकर ही नहीं रहे बल्कि वह उनके फाइनेंस तक देखा करते थे। इतना ही नहीं बल्कि वह लता मंगेशकर जी के प्रोग्राम भी अरेंज करवाते और इस बात का भी खास ख्याल रखते थे की दवाई भी लता जी समय पर लें।

लता मंगेशकर जी के घर में ऐसे मिला था काम

दरअसल, एक बातचीत के दौरान महेश राठौड़ ने यह बताया था कि लता मंगेशकर जी के घर में उनकी एंट्री किस प्रकार से हुई थी। उन्होंने बताया कि “एक पुलिसवाला मुझे राधाकृष्ण देशपांडे के पास ले गया, जो सालों से लता दीदी का काम देख रहे थे। उन्होंने मेरा फोन नंबर लिया और 3 दिन बाद मुझे फोन करके प्रभु कुंज आने को बोला। एक छोटे से इंटरव्यू के बाद मुझे लता दीदी के काम के लिए रख लिया गया। शुरुआत में मुझे ड्राइवर की नौकरी दी गई। मुझे ड्राइव करना नहीं आता, लेकिन फिर भी हां।”

दिन में करते थे लता जी के लिए काम, रात को करते थे पढ़ाई

लता दीदी के घर पर महेश राठौड़ दिन भर काम किया करते थे और रात के समय वह बैठकर अपनी पढ़ाई किया करते थे। इसी प्रकार दिन में काम करते और रात में पढ़ाई करते हुए उन्होंने कॉमर्स से अपनी ग्रैजुएशन पूरी कर ली। वहीं राधाकृष्ण देशपांडे ने महेश राठौड़ के लिए कहा कि जब वह उनके पास काम की तलाश में थे तो उन्होंने उनकी आंखों में सच्चाई देखी थी। उन्होंने कहा “ऐसा भी वक्त आया जब महेश राठौड़ नौकरी छोड़ना चाहते थे। लेकिन मैंने उनसे कहा कि लता ताई को तुमसे अच्छा आदमी नहीं मिलेगा।”

तो फिर क्या था महेश उनकी बात मान गए और फिर वही पर रुक गए। लता मंगेशकर जी के यहां पर वह काम करते रहे। उन्हें 4 साल इस बात पर परिवार को विश्वास दिलाने में लग गए। महेश के अनुसार, जब उन्होंने परिवार को लता दीदी के साथ अपनी तस्वीरें दिखाईं, तब जाकर उन्हें विश्वास हुआ।

महेश की तीनों बेटियों के नाम लता जी ने रखे थे

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान महेश राठौड़ की पत्नी मनीषा ने यह बताया कि “साल 2001 में लता दीदी ने अचानक ही महेश के अंकल को फोन किया। महेश वहां रक्षा बंधन मनाने गए थे। लता दीदी ने महेश को ‘प्रभु कुंज’ बुलाया। वहां जाकर देखा तो लता दीदी राखी के साथ इंतजार कर रही थीं।” मनीषा ने यह बताया था कि उनकी तीनों बेटियों के नाम लता दीदी ने ही रखे थे।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महेश राठौड़ रोते-रोते लता मंगेशकर जी के बारे में करीबी दोस्त निकुंज पंडित को बता रहे थे। निकुंज का भी गला रूंध गया था। निकुंज ने कहा कि उन्होंने महेश से हिम्मत रखने और खुद को संभालने के लिए कहा क्योंकि भारी संख्या में लोग लता दीदी को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंच रहे थे। ऐसे में सब कुछ संभालने वाले महेश थे।

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